अफ्रीका में फिर लौटा इबोला!65 लोगों की मौत, 246 संदिग्ध मामलों से बढ़ी दहशत; सीमावर्ती देशों में अलर्ट

कांगो| अफ्रीका के कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक बार फिर इबोला वायरस ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। इटुरी प्रांत में सामने आए नए प्रकोप ने स्वास्थ्य व्यवस्था को अलर्ट पर ला दिया है। अब तक लगभग 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 246 से अधिक लोगों में संक्रमण का संदेह जताया गया है। कई मामलों में जांच जारी है और संक्रमित क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। सीमावर्ती इलाकों और खनन गतिविधियों की वजह से वायरस के फैलने का खतरा और अधिक बढ़ गया है।
तेजी से फैलता संक्रमण
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के इटुरी प्रांत में इबोला वायरस का नया प्रकोप तेजी से फैल रहा है। कई इलाकों में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मोंगवालु और रम्पारा स्वास्थ्य क्षेत्रों को सबसे ज्यादा प्रभावित बताया गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं और मौतों की पुष्टि हुई है। बुनिया शहर में भी कई संदिग्ध मरीज सामने आए हैं, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव बढ़ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य टीमें लगातार काम कर रही हैं।
मौतों और संदिग्ध मामलों ने बढ़ाई चिंता
अब तक लगभग 65 लोगों की मौत हो चुकी है, 246 से अधिक लोगों में इबोला संक्रमण का संदेह जताया गया है। कई मामलों में लैब जांच जारी है और कुछ नमूनों में वायरस की पुष्टि भी हुई है। परीक्षण में लिए गए नमूनों में से कई में संक्रमण के संकेत मिले हैं, जिससे यह साफ होता है कि वायरस तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सही आंकड़े आने में अभी समय लग सकता है क्योंकि कई क्षेत्रों में पहुंच मुश्किल है।
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खनन गतिविधियां बड़ी चुनौती
इबोला के फैलने के पीछे खनन क्षेत्रों में होने वाली अनियंत्रित आवाजाही एक बड़ी वजह बन रही है। लोग रोजगार और व्यापार के लिए लगातार दूसरी जगह जा रहे हैं, जिससे संक्रमण पर नियंत्रण मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति भी कमजोर है, जिसके कारण स्वास्थ्य कर्मियों को काम करने में दिक्कत आ रही है।
वायरस के स्ट्रेन पर वैज्ञानिकों की नजर
स्वास्थ्य मंत्रालय और वैज्ञानिक टीमें इस बात की जांच कर रही हैं कि यह प्रकोप किस प्रकार के इबोला स्ट्रेन से जुड़ा है। शुरुआती संकेतों में इसे नॉन-जायरे स्ट्रेन से जोड़ा जा रहा है लेकिन इसकी पुष्टि जीन अनुक्रमण के बाद ही होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेन की पहचान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे इलाज और वैक्सीन की रणनीति तय की जाती है।
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अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां हुईं सक्रिय
इस प्रकोप के बाद अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ आपात बैठक की है। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई वैश्विक दवा कंपनियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।











