सुप्रीम कोर्ट में अब ऑनलाइन सुनवाई :जजों की कार-पूलिंग से लेकर WFH तक, नए निर्देश जारी; फ्यूल संकट का असर

सुप्रीम कोर्ट ने देश में संभावित फ्यूल संकट को देखते हुए कई बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार की फ्यूल बचाने की अपील के बाद कोर्ट ने कुछ मामलों की सुनवाई अब केवल वर्चुअल माध्यम से करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही जजों के लिए कार-पूलिंग और रजिस्ट्री स्टाफ के लिए आंशिक वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था भी लागू की गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी सुनवाई
शुक्रवार को जारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर ने बताया कि सोमवार, शुक्रवार और आंशिक कार्य दिवसों में सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई अब अगले आदेश तक सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक समय पर भेजे जाएं और सुनवाई के दौरान तकनीकी दिक्कत न हो। जरूरत पड़ने पर तुरंत तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
जजों के लिए कार-पूलिंग व्यवस्था
फ्यूल बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने आपसी सहमति से कार-पूलिंग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इससे ईंधन की खपत कम करने की कोशिश की जाएगी।
रजिस्ट्री स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री की हर शाखा और सेक्शन में 50 फीसदी तक कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन घर से काम करने की अनुमति दी है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए जरूरी स्टाफ का ऑफिस में मौजूद रहना अनिवार्य होगा।
साप्ताहिक रोस्टर बनाने के निर्देश
रजिस्ट्रारों को कर्मचारियों के लिए साप्ताहिक रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहना होगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्यालय पहुंचना होगा। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि यदि किसी शाखा में काम की प्रकृति वर्क-फ्रॉम-होम के अनुकूल नहीं है, तो अधिकारी इस व्यवस्था में बदलाव कर सकते हैं।
US-ईरान तनाव के बाद लिया गया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम केंद्र सरकार और डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) के उस निर्देश के बाद उठाया है, जिसमें US-ईरान संघर्ष के बाद संभावित फ्यूल संकट को देखते हुए ईंधन बचाने की अपील की गई थी।











