Vietnam Boat Accident :'महज 3 मिनट में सब खत्म हो गया', जिंदा बचे भारतीय पर्यटक ने बताई नाव हादसे की पूरी कहानी

वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास 11 जुलाई को हुए दर्दनाक नाव हादसे से बचकर भारत लौटे एक भारतीय पर्यटक ने उस भयावह मंजर का आंखों देखा हाल सुनाया है। हादसे में जीवित बचे तमिलनाडु के दिंडीगुल निवासी निर्मल कुमार ने बताया कि पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। उनके मुताबिक, एक तेज समुद्री लहर ने नाव का संतुलन बिगाड़ दिया और महज तीन मिनट के भीतर नाव पलट गई। इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की जान चली गई, जबकि 16 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। एक घायल अब भी फू क्वोक के अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती है।
आखिर कैसे पलटी नाव?
निर्मल कुमार ने चेन्नई पहुंचने के बाद बताया कि वह अपने साथियों के साथ 8 जुलाई को वियतनाम घूमने गए थे। 11 जुलाई को यात्रा के अंतिम दिन 32 भारतीय पर्यटक और चार स्थानीय चालक दल के सदस्य एक बंद स्पीडबोट से एक द्वीप से दूसरे द्वीप की ओर जा रहे थे। इसी दौरान अचानक समुद्र में तेज और ऊंची लहर उठी, जिसने नाव को जोरदार टक्कर मारी। उन्होंने बताया कि पहले नाव हल्की सी एक ओर झुकी, फिर बाईं तरफ बैठे यात्री दाईं ओर गिर पड़े। इससे नाव का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और करीब तीन मिनट के भीतर पूरी नाव पलट गई।
कुछ लोग कूदकर बच गए, कई नाव के अंदर ही फंस गए
निर्मल कुमार के अनुसार, हादसे के दौरान नाव के चालक और गाइड सबसे पहले समुद्र में कूद गए। उन्हें देखकर वह और करीब 20 अन्य यात्री भी तुरंत पानी में उतर गए और किसी तरह अपनी जान बचा ली। हालांकि नाव के पिछले हिस्से में बैठे कई यात्री बाहर नहीं निकल सके। उन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन नाव पलटने के बाद वे उसके अंदर ही फंस गए। निर्मल ने बताया कि उलटी नाव उनके ऊपर आ गई थी, जिसके कारण वे बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ़ पाए।
10 मिनट में पहुंची रेस्क्यू टीम, लेकिन तब तक हो चुकी थी देर
निर्मल कुमार ने बताया कि हादसे के लगभग 10 मिनट बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गया। पानी में तैर रहे लोगों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन नाव के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने में 20 से 30 मिनट लग गए। उन्होंने बताया कि इस हादसे में उन्होंने अपने बचपन के दोस्त मुरुगा प्रभु को खो दिया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि मैं तब तक वियतनाम नहीं लौटा, जब तक मेरे दोस्त का शव बरामद नहीं हो गया और उससे जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो गईं।
'समय पर इलाज मिलता तो कुछ और जानें बच सकती थीं'
निर्मल कुमार ने बताया कि उनके साथ यात्रा कर रहे एक डॉक्टर का मानना था कि यदि घटनास्थल पर तुरंत जरूरी दवाएं और पर्याप्त प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध होती, तो चार से पांच लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे को वियतनाम सरकार के सामने भी रख रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।
तमिलनाडु के 10 लोगों की गई जान
इस हादसे में कुल 36 लोग सवार थे, जिनमें 32 भारतीय पर्यटक और चार स्थानीय चालक दल के सदस्य शामिल थे। हादसे में 15 भारतीयों की मौत हुई। मृतकों में 10 तमिलनाडु, तीन आंध्र प्रदेश और दो केरल के निवासी थे। तमिलनाडु के मृतकों में चार चेन्नई, तीन तिरुचिरापल्ली तथा एक-एक व्यक्ति सलेम, इरोड और तिरुप्पुर जिले का रहने वाला था। मृतकों में दो महिलाएं भी शामिल थीं।
शव भारत पहुंचे, सरकार से की आर्थिक मदद की अपील
हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर 13 जुलाई की रात विशेष विमान से मुंबई लाए गए। इसके बाद मंगलवार को उन्हें चेन्नई और कोयंबटूर भेजा गया, जहां राज्य सरकार ने परिजनों तक सम्मानपूर्वक शव पहुंचाने की व्यवस्था की। निर्मल कुमार ने भारतीय दूतावास और वियतनाम सरकार की ओर से राहत एवं समन्वय में दिए गए सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता पैकेज की मांग करते हुए कहा कि विदेश में हुई इस त्रासदी ने कई परिवारों को हमेशा के लिए गहरा दुख दे दिया है।












