पोलैंड की नेता ने जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंकी!पोस्टर में हिटलर को दिखाया था, यूक्रेन पर इतिहास को लेकर लगाए गंभीर आरोप

वारसॉ। पोलैंड की राजनेता और क्राकोव के मेयर पद की उम्मीदवार मरिआना श्राइबर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर विवादित बयान दिया है। श्राइबर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने जेलेंस्की की तस्वीर कूड़ेदान में फेंक दी। उन्होंने यूक्रेन पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के नरसंहार से जुड़े राष्ट्रवादी संगठनों और नेताओं का महिमामंडन करने का आरोप लगाया।
वीडियो में क्या- क्या दिखा?
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में मरिआना श्राइबर पहले जेलेंस्की की एक तस्वीर दिखाती हैं, जिस पर हिटलर जैसी मूंछ बनाई गई थी। इसके बाद वह तस्वीर को मोड़कर कूड़ेदान में फेंक देती हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि अपराधियों का महिमामंडन करने वालों की जगह इतिहास के कूड़ेदान में है। उन्होंने यह भी कहा कि बांदेरावादी नायक नहीं हैं, बल्कि मानवता के लिए कलंक हैं। श्राइबर का आरोप है कि यूक्रेन ने अब तक पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए आधिकारिक रूप से माफी नहीं मांगी है।
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'ब्लडी संडे' की बरसी पर दिया बयान
श्राइबर का यह बयान 11 जुलाई 1943 की 'ब्लडी संडे' घटना की बरसी पर आया। पोलैंड के अनुसार, उस दिन यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) ने वोल्हीनिया क्षेत्र के कई पोलिश गांवों पर एक साथ हमले किए थे। पोलैंड का दावा है कि 1943 से 1944 के बीच हुए इन हमलों में करीब एक लाख पोलिश नागरिकों की हत्या हुई थी। पोलैंड इन घटनाओं को नरसंहार मानता है, जबकि इस मुद्दे पर यूक्रेन का अलग नजरिया रहा है।
क्या है वोलिन नरसंहार विवाद?
वोलिन नरसंहार को लेकर पोलैंड और यूक्रेन के बीच कई वर्षों से मतभेद बने हुए हैं। पोलैंड का आरोप है कि 1939 से 1945 के बीच वोलिन, पूर्वी गैलिसिया और आसपास के इलाकों में यूक्रेनी राष्ट्रवादी संगठनों ने बड़ी संख्या में पोलिश नागरिकों की हत्या की। पोलैंड इन हत्याओं के लिए यूक्रेनी राष्ट्रवादियों के संगठन OUN और यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) को जिम्मेदार ठहराता है और इन्हें नरसंहार मानता है।
2026 में फिर बढ़ा विवाद
यह विवाद 2026 में फिर चर्चा में आया, जब राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने OUN-UPA के एक प्रमुख नेता के अवशेषों के पुनर्दफन समारोह में हिस्सा लिया। इसके अलावा यूक्रेनी सेना की एक इकाई का नाम भी "UPA के नायकों" के नाम पर रखा गया।इन घटनाओं के बाद पोलैंड में विरोध तेज हो गया और जेलेंस्की से पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल' वापस ले लिया गया।











