Varuthini Ekadashi 2026 :13 या 14 अप्रैल... कब है वरुथिनी एकदाशी? जानें सही तिथि, नियम और वर्जित चीजें

साल 2026 में वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल रविवार को है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत विधि अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, पीले वस्त्र पहनें, तुलसी और अक्षत अर्पित करें। चावल, मांसाहारी और तामसिक भोजन वर्जित है।
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13 या 14 अप्रैल... कब है वरुथिनी एकदाशी? जानें सही तिथि, नियम और वर्जित चीजें
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि प्राप्त होती है। वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। साल 2026 में वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 13 अप्रैल रात 1:16 बजे शुरू होकर 14 अप्रैल रात 1:08 बजे तक रहेगी।

    वरुथिनी एकादशी का महत्व

    वरुथिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिषियों के अनुसार, इस व्रत को करने से कन्यादान और 10,000 वर्षों की तपस्या के समान फल मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। व्रत करने से न केवल पापों का नाश होता है बल्कि मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी खुलता है। यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है।

    व्रत करने का सही समय और विधि

    • सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
    • स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें।
    • पूजा के लिए चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
    • उन्हें अक्षत, फल, पीले फूल, चंदन और तुलसी अर्पित करें।
    • मंत्रों का जाप और विधिवत पूजा करें।
    • वरुथिनी एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये गलती
    • चावल और तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, शलजम, बैंगन) का सेवन न करें।
    • मांसाहारी पदार्थ और मादक पेय जैसे अंडा, मांस, मछली, शराब, बीड़ी, सिगरेट पूरी तरह वर्जित हैं।
    • नकारात्मक भाव, ईर्ष्या, अपवित्र विचार और गलत मानसिकता से भी व्रत का फल प्रभावित होता है।
    • व्रत के 24 घंटे पहले से ही इन चीजों से दूरी बनाना आवश्यक है।

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    वरुथिनी एकादशी का लाभ

    • सभी पाप नष्ट होते हैं।
    • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
    • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
    • अन्य एकादशियों से बड़ा व्रत माना जाता है और इसका पुण्य अधिक होता है।

    वरुथिनी एकादशी का व्रत अन्य एकादशियों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इसे करने से साधक के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है। इसके अलावा यह व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला भी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और भक्त को उसके पुण्य फल तुरंत प्राप्त होते हैं।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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