हिंदू धर्म में हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को रात 12:12 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 10:31 बजे समाप्त होगी।
प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए वैशाख का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार को रखा जाएगा। बुधवार को पड़ने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है।
प्रदोष पूजा मुहूर्त - 06:47 पी एम से 09:00 पी एम
ब्रह्म मुहूर्त - 04:27 ए एम से 05:11 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 04:49 ए एम से 05:56 ए एम
अभिजित मुहूर्त - कोई नहीं
विजय मुहूर्त - 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:46 पी एम से 07:08 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 06:47 पी एम से 07:54 पी एम
अमृत काल - 07:37 ए एम से 09:10 ए एम
निशिता मुहूर्त - 11:59 पी एम से 12:43 ए एम, 16 अप्रैल
इस दौरान भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम से प्रदोष व्रत करता है, उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है। इस व्रत को करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। वैवाहिक जीवन की परेशानियां कम होती हैं। जीवन की कई समस्याएं दूर होती हैं। इसी कारण भगवान शिव के भक्त प्रदोष व्रत को बहुत शुभ और फलदायी मानते हैं।