भोपाल: गरीब बेटियों की पढ़ाई के लिए आगे आए प्रशासनिक अफसर, पन्ना में डीएसपी ने झोली फैलाई, पांच मिनट में आए 36 हजार रुपए

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। पन्ना की अनामिका पटेल ने महुआ बीनकर पढ़ाई की और 12वीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल किए। वहीं मंडला की दिव्यांग छात्रा द्रोपदी धुर्वे ने पैरों से लिखकर प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की। दोनों छात्राओं की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी शिक्षा और भविष्य संवारने का जिम्मा उठाया है।
महुआ बीनकर पढ़ाई कर किया टॉप
पन्ना जिले के देवगांव की रहने वाली अनामिका पटेल ने कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई जारी रखी। महुआ बीनकर पैसे जुटाने वाली अनामिका ने 12वीं की परीक्षा में 91 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। गांव में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में उसने बताया कि वह एमपीपीएससी परीक्षा पास कर अफसर बनना चाहती है, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर है। यह सुनते ही सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स वाले डीएसपी संतोष पटेल ने तौलिया फैलाकर मदद की अपील कर दी। कुछ ही मिनटों में अनामिका की पढ़ाई के लिए 36 हजार रुपए एकत्र हो गए।
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लक्ष्य शिक्षा फाउंडेशन भी आया मदद के लिए आगे
अनामिका की संघर्ष भरी कहानी सुनने के बाद लक्ष्य शिक्षा फाउंडेशन ने भी सहयोग का भरोसा दिया। फाउंडेशन की ओर से छात्रा को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। कार्यक्रम में मौजूद आईआरएस अमरपाल सिंह लोधी ने भी अनामिका के हौसले की सराहना की। अनामिका ने कहा कि वह पढ़-लिखकर अधिकारी बनना चाहती है और परिवार की स्थिति बदलना चाहती है। उसकी मेहनत और लगन ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया।

पैरों से लिखकर द्रोपदी ने हासिल की सफलता
मंडला जिले के ग्राम करौंदा टोला की दिव्यांग छात्रा द्रोपदी धुर्वे ने अपने पैरों से लिखकर 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। द्रोपदी की इस उपलब्धि की जानकारी मिलने पर कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे खुद उसके घर पहुंचे। उन्होंने छात्रा का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आर्थिक तंगी उसकी पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दी जाएगी। कलेक्टर ने द्रोपदी को आगे भी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। द्रोपदी की मेहनत और आत्मविश्वास ने हर किसी को प्रेरित किया है।
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कलेक्टर राहुल धोटे ने की मदद
कलेक्टर राहुल धोटे ने द्रोपदी के परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने द्रोपदी के पिता को मुर्गी पालन जैसे स्वरोजगार से जुड़ने की सलाह दी ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। साथ ही राशन कार्ड और आवास सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि द्रोपदी का परिवार किसी भी कल्याणकारी योजना से वंचित नहीं रहेगा। इन दोनों बेटियों की सफलता अब प्रदेशभर में प्रेरणा की मिसाल बन गई है।












