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Iran- US War :ट्रंप का बड़ा बयान- ईरान से समझौता नहीं हुआ तो पहले से घातक युद्ध हो सकता है...

ट्रंप ने बताया कि ईरान और मध्य पूर्व की स्थिति पर उन्होंने कई मुस्लिम देशों के नेताओं से चर्चा की है। इन नेताओं में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद, कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन और पाकिस्तान के शीर्ष नेता शामिल रहे।
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ट्रंप का बड़ा बयान- ईरान से समझौता नहीं हुआ तो पहले से घातक युद्ध हो सकता है...
मिडिल ईस्ट होगा सबसे ताकतवर क्षेत्र, अब्राहम समझौतों पर ट्रंप का बड़ा प्लान https://www.aajtak.in/world/story/donald-trump-iran-deal-abraham-accords-middle-east-ntc-mkg-dskc-2561867-2026-05-25

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। लेकिन इसका नतीजा दो ही तरह का हो सकता है या तो एक बड़ा शांति समझौता होगा या फिर पहले से ज्यादा बड़े संघर्ष की स्थिति बन सकती है।

ट्रंप ने कहा, यह या तो बहुत बड़ी डील साबित होगी या कोई समझौता नहीं होगा। अगर समझौता नहीं हुआ, तो दुनिया फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष की तरफ जा सकती है।

कई मुस्लिम देशों के नेताओं से बातचीत

ट्रंप ने बताया कि ईरान और मध्य पूर्व की स्थिति पर उन्होंने कई मुस्लिम देशों के नेताओं से चर्चा की है। इन नेताओं में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायेद, कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन और पाकिस्तान के शीर्ष नेता शामिल रहे। ट्रंप का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता लाने और संभावित समझौते को मजबूत बनाने के लिए लगातार कूटनीतिक संपर्क जारी है।

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अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील क्यों?

ट्रंप ने कई देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की। यह समझौता मध्य पूर्व में देशों के बीच रिश्ते सामान्य बनाने और सहयोग बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि यूएई और बहरीन पहले से इस समझौते का हिस्सा हैं और इससे उन्हें आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक फायदे मिले हैं। ट्रंप के मुताबिक, ज्यादा देशों के जुड़ने से ईरान के साथ संभावित समझौता और मजबूत तथा “ऐतिहासिक” बन सकता है।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम समझौता अमेरिका की पहल पर शुरू हुआ एक कूटनीतिक समझौता है, जिसका मकसद मध्य पूर्व में देशों के बीच रिश्ते बेहतर करना है। ट्रंप ने इसे दुनिया के सबसे अहम समझौतों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और कतर को जल्द इसमें शामिल होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि भविष्य में ईरान को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा सकता है।

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चिंता की वजह क्या है?

  • ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम, सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है।
  • अगर अमेरिका-ईरान वार्ता सफल होती है, तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है। लेकिन बातचीत विफल होने पर क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने और वैश्विक अस्थिरता का खतरा भी बना रहेगा।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल अमेरिका की कोशिश कूटनीतिक समाधान निकालने की है। आने वाले दिनों में ईरान के साथ बातचीत और तेज हो सकती है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह बातचीत किसी बड़े शांति समझौते में बदलेगी, या फिर मध्य पूर्व एक नए टकराव की ओर बढ़ेगा।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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