छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ का अलर्ट! दक्षिण बस्तर के 5 जिलों में हाई अलर्ट, 27 से 29 अक्टूबर तक विशेष सतर्कता

रायपुर: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। खासकर दक्षिण बस्तर के पांच जिलों में तेज हवाओं की आशंका के मद्देनजर प्रशासन को अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में 27 से 29 अक्टूबर तक की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी जिला कलेक्टरों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है।
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चक्रवात पर सरकार अलर्ट, कलेक्टरों को सख्त निर्देश
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के कलेक्टर और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में संभावित मौसम संबंधी परिस्थितियों से निपटने, राहत एवं बचाव व्यवस्था मजबूत करने और प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियां समय पर पूरी करने पर जोर दिया गया।
दक्षिण बस्तर के 5 जिलों पर विशेष नजर
प्रशासन ने बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए संवेदनशील इलाकों की पहचान, लोगों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

जीरो कैजुअल्टी का लक्ष्य, राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश
बैठक में सबसे अधिक जोर जनहानि रोकने पर रहा। अधिकारियों को राहत शिविरों को 24 घंटे संचालित रखने और वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध बनाए रखने के साथ गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
किसानों के लिए एडवाइजरी, फसल और पशुधन की सुरक्षा पर जोर
संभावित चक्रवाती परिस्थितियों को देखते हुए किसानों के लिए फसलों से संबंधित विस्तृत सलाह जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को फसलों और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। स्कूलों के बच्चों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
NDRF और SDRF की टीमें रहेंगी तैयार
आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को निर्धारित स्थानों पर तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन को मौसम संबंधी चेतावनियों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बिजली, सड़क और मोबाइल नेटवर्क पर विशेष फोकस
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने तेज हवाओं से कच्चे मकानों को संभावित नुकसान का आकलन करने और संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत बताई। बिजली के खंभे गिरने या विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए बिजली विभाग को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। दूरसंचार सेवाएं चालू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं, तेज हवाओं से पेड़ गिरने पर उन्हें तत्काल हटाकर सड़क मार्गों पर आवागमन बहाल रखने के निर्देश दिए गए हैं। होर्डिंग्स और अन्य असुरक्षित संरचनाओं की भी जांच करने पर जोर दिया गया है।
आपात स्थिति से निपटने की तैयारी
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया समेत NDRF, SDRF, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य शासन ने सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाए रखने और किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं।




















