यूपी में कौशल विकास और रोजगार को बढ़ावा, 9 जोन में बंटेगा प्रदेश; युवाओं को मिलेगा रोजगार

लखनऊ। योजना का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को कुशल कामगारों की आपूर्ति के बड़े केंद्र और ग्लोबल मैनपावर हब के रूप में विकसित करना है। इसके तहत पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर युवाओं को तकनीकी और गैर-तकनीकी प्रशिक्षण के साथ भारतीय और विदेशी भाषाएं सीखने का अवसर भी मिलेगा। प्रशिक्षण के बाद युवाओं को देश और विदेश में रोजगार दिलाने के लिए प्लेसमेंट सेल और सेवायोजन कार्यालय की व्यवस्था की जाएगी। योजना से उद्योगों की जरूरत के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार करने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
योगी सरकार ने कौशल विकास एवं रोजगार योजना को दी मंजूरी
सीएम योगी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (एसवीपीएसटीपीजेड) विकास योजना को मंजूरी दी गई। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश को अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर और ग्लोबल मैनपावर हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों को शामिल करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देकर देश और विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
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प्रदेश के औद्योगिक विकास में MSME क्षेत्र की अहम भूमिका
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में करीब 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं, जो देश के लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 प्रतिशत हैं। राज्य के औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत है, जबकि तीन करोड़ से अधिक लोग इससे जुड़े हुए हैं। उद्योगों की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक कुशल कामगार तैयार करने और युवाओं को बड़े स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में नई योजना की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है।
पहले चरण में 5 शहरों में खुलेंगे कौशल प्रशिक्षण केंद्र
योजना के पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें लखनऊ में एमएसएमई विभाग की ओर से, कानपुर में सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल पर और गोरखपुर में गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से केंद्र बनाया जाएगा। गौतमबुद्ध नगर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से केंद्र स्थापित होगा। वहीं, झांसी में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की ओर से कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र बनाया जाएगा।
नौ जोन में बांटे जाएंगे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिले
कौशल विकास और रोजगार की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश को नौ जोन में विभाजित किया जाएगा। जोन-1 में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़, जबकि जोन-2 में सहारनपुर मंडल के साथ बुलंदशहर, बागपत और मेरठ शामिल होंगे। जोन-3 में मुरादाबाद और बरेली मंडल, जोन-4 में आगरा और अलीगढ़ मंडल, जोन-5 में लखनऊ और अयोध्या मंडल को रखा गया है। जोन-6 में कानपुर और प्रयागराज मंडल, जोन-7 में चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी मंडल, जोन-8 में वाराणसी और आजमगढ़ मंडल और जोन-9 में गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल शामिल होंगे। प्रत्येक जोन में स्थानीय उद्योगों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं के आधार पर प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
केंद्रों के लिए 10 से 25 एकड़ जमीन
प्रत्येक कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र की स्थापना के लिए 10 से 25 एकड़ तक उपयुक्त और भारमुक्त जमीन की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए नजदीकी राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो साल के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इन केंद्रों का विकास और संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता पर आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण यानी डीबीएफओटी मॉडल के तहत किया जा सकेगा। इसके अलावा शासकीय संस्थाओं के माध्यम से भी केंद्रों का विकास और संचालन किया जाएगा।
तकनीकी प्रशिक्षण के साथ विदेशी भाषाएं भी सीखेंगे युवा
योजना के तहत मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके युवाओं के लिए तकनीकी कौशल को बेहतर बनाने की व्यवस्था होगी। देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए जरूरत के अनुसार भारतीय और विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास, सेवायोजन कार्यालय और परिसर में ही प्लेसमेंट सेल बनाया जाएगा।




















