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Instagram की दोस्ती प्यार में बदली, 3 बच्चों को छोड़ सहेली के साथ रहने चली गई महिला; कानपुर से सामने आया अनोखा मामला

कानपुर के महाराजपुर में तीन बच्चों की मां Instagram पर बनी 25 वर्षीय महिला मित्र के साथ रहने के लिए घर छोड़कर दिल्ली चली गई। पुलिस ने महिला को बरामद कर परिजनों से मिलवाया, लेकिन उसने पति और बच्चों के साथ लौटने से इनकार कर दिया। बालिग होने के कारण पुलिस ने उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए उसे सहेली के साथ जाने दिया।
Instagram की दोस्ती प्यार में बदली, 3 बच्चों को छोड़ सहेली के साथ रहने चली गई महिला; कानपुर से सामने आया अनोखा मामला

कानपुर। महाराजपुर इलाके में एक महिला अपने तीन बच्चों और पति को छोड़कर दिल्ली में रहने वाली अपनी 25 वर्षीय सहेली के साथ चली गई। दोनों की करीब एक साल पहले Instagram के जरिए दोस्ती हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी और महिला ने सहेली के साथ रहने की इच्छा जताई। महिला के अचानक घर से चले जाने के बाद पति ने महाराजपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

मोबाइल लोकेशन से दिल्ली पहुंची पुलिस

पुलिस ने जांच के दौरान महिला के मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल की जानकारी जुटाई। जांच में दिल्ली का नंबर सामने आया। इसके बाद पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर महिला और उसकी सहेली को बरामद कर लिया और दोनों को महाराजपुर थाने लाया गया। एसीपी आशुतोष सिंह ने महिला से बातचीत की। महिला ने पुलिस को बताया कि वह अपनी सहेली से प्यार करती है और उसी के साथ रहना चाहती है।

बच्चों ने मां से घर चलने की गुहार लगाई

महिला के बरामद होने की जानकारी मिलने के बाद उसके पति, बच्चे और माता-पिता भी थाने पहुंचे। वहां बच्चों ने अपनी मां से घर वापस चलने की गुहार लगाई। हालांकि, महिला ने वापस पति और बच्चों के साथ जाने से इनकार कर दिया। उसने सहेली के साथ रहने की इच्छा जताई।

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बालिग होने के कारण पुलिस ने जाने दिया

पुलिस के मुताबिक, महिला बालिग है और उसने अपनी इच्छा से सहेली के साथ रहने की बात कही। ऐसे मामलों में कानून बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से रहने का अधिकार देता है। इसी कानूनी स्थिति और न्यायालय के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने महिला को उसकी सहेली के साथ जाने की अनुमति दी।

बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार अलग

कानपुर के वरिष्ठ वकील तत्वेश अग्रवाल के मुताबिक, हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 की धारा 20 के तहत बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े अधिकार अलग हैं। यानी महिला का अपनी पसंद से रहने का अधिकार होने के बावजूद बच्चों के भरण-पोषण और खर्च से जुड़े कानूनी दायित्व का सवाल अलग से तय हो सकता है। इस मामले में महिला के वैवाहिक और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े पहलुओं का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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