वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बीच जंग का आठवां दिन बेहद तनावपूर्ण बन गया है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति को और तेज करने का फैसला किया है।
अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि आज रात ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा बमबारी अभियान चलाया जा सकता है। उनका कहना है कि इस हमले का मकसद ईरान की मिसाइल क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर करना है।
फॉक्स बिजनेस के कार्यक्रम ‘कुडलो’ में बातचीत के दौरान स्कॉट बेसेंट ने कहा कि, अमेरिकी सेना ईरान की सैन्य क्षमताओं को लगातार कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि, आज रात हमारा अब तक का सबसे बड़ा बमबारी अभियान होगा। हम ईरान के मिसाइल लॉन्चरों और मिसाइल निर्माण फैक्ट्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले हैं। बेसेंट के अनुसार अमेरिका का अभियान अब तक बेहद प्रभावी रहा है और ईरान पर इसका गहरा असर पड़ा है।
बेसेंट ने कहा कि, इस अभियान में ईरान के मिसाइल लॉन्चर, मिसाइल भंडार और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को मुख्य निशाना बनाया जाएगा। इससे ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा झटका देने की कोशिश की जाएगी।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि, ईरान इस समय दो मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। एक तरफ उसे अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ता जा रहा है। बेसेंट ने कहा कि, लगातार हो रहे हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो रही है।
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इस बीच इजरायल ने भी ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार देर रात इजरायली सेना ने तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया। हमले के बाद एयरपोर्ट इलाके में आग और धुएं का गुबार उठता देखा गया। यह हमला ईरान की सैन्य गतिविधियों को प्रभावित करने के मकसद से किया गया बताया जा रहा है।
इस बीच खबर है कि, अमेरिका ईरान में जमीनी स्तर पर सीमित सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व ने व्हाइट हाउस के भीतर इस संभावना पर चर्चा की है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नेतृत्व बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध की योजना नहीं बना रहा है। इसके बजाय सीमित संख्या में सैनिकों को विशेष मिशन के लिए भेजने पर विचार किया जा सकता है।
इस संघर्ष के बीच अमेरिका ने इजरायल को सैन्य सहायता देने की भी घोषणा की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लगभग 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी है। इस पैकेज में BLU-110A/B सामान्य उपयोग वाले बम और अन्य लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि, मौजूदा आपात स्थिति में इजरायल को तुरंत सैन्य सहायता देना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि, यह कदम अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में है।
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इस जंग में वैश्विक शक्तियों की भूमिका भी सामने आने लगी है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ईरान को खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि रूस ईरान को मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य विमानों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी दे रहा है। यह जानकारी ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में मदद कर सकती है।
अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया है कि, वह वैश्विक आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि, इसका एक बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक है। यदि इस मार्ग पर संकट पैदा होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार को संतुलित करने के लिए अमेरिका ने एक अहम कदम उठाया है। अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि, इससे वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
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स्कॉट बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि, अमेरिका रूस के कुछ कच्चे तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। उन्होंने कहा कि, प्रतिबंधित कच्चे तेल के करोड़ों बैरल समुद्र में मौजूद हैं और यदि उन पर प्रतिबंध हटाया जाता है तो बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है। इस कदम से वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। इजरायली सेना का कहना है कि, ईरान ने हाल ही में मिसाइलों की नई खेप दागी है। इन मिसाइलों को रोकने के लिए इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दी गई है।
इजरायली सेना ने कहा है कि, संभावित खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को मोबाइल फोन के जरिए अलर्ट भेजे गए हैं। सेना का कहना है कि, मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने के लिए रक्षा प्रणालियां लगातार काम कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस संघर्ष के दौरान अब तक 13 देशों को निशाना बनाया है। इन देशों में शामिल हैं-
इन हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
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अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान की नौसेना को भी भारी नुकसान हुआ है। एक सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के अनुसार, हमलों के पहले सप्ताह में ही ईरान के दो नौसैनिक अड्डों को गंभीर क्षति पहुंची है। कम से कम सात जहाज नष्ट हो गए और कई नौसैनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है। जंग के बीच कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि युद्ध लंबा चला तो ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता आ सकती है।