ईरान पर बड़े हमले की तैयारी?इजरायल को 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार देगा अमेरिका, 12 हजार BLU-110 बम शामिल

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच अमेरिका ने इजरायल को 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार देने की मंजूरी दी है। इस आपात डील में 12,000 BLU-110 हवाई बम, लॉजिस्टिक और तकनीकी सहायता शामिल है। जानें जंग के बीच अमेरिका-इजरायल सैन्य समझौते के मायने, रूस-ईरान विवाद और पूरे संघर्ष की टाइमलाइन।
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इजरायल को 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार देगा अमेरिका, 12 हजार BLU-110 बम शामिल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने अपने सबसे करीबी सहयोगी इजरायल को बड़ा सैन्य समर्थन देने का फैसला लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने लगभग 151.8 मिलियन डॉलर (करीब 1,250 करोड़ रुपए) के हथियार और सैन्य सहायता पैकेज को मंजूरी दे दी है।

    सबसे खास बात यह है कि, इस हथियार सौदे को सामान्य प्रक्रिया के बजाय आपातकालीन प्रावधानों के तहत मंजूरी दी गई है। यानी अमेरिकी संसद की लंबी समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए इसे तुरंत मंजूरी दी गई। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है और पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है।

    क्यों खास है यह हथियार डील

    अमेरिका और इजरायल के बीच हुई इस डील को मौजूदा युद्ध परिस्थितियों के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि, मौजूदा हालात एक ऐसी आपात स्थिति पैदा कर रहे हैं जिसमें इजरायल को तुरंत रक्षा सामग्री उपलब्ध कराना जरूरी है।

    सरकार का कहना है कि यह सौदा-

    • इजरायल की सैन्य क्षमता को मजबूत करेगा।
    • क्षेत्रीय खतरों का मुकाबला करने में मदद करेगा।
    • मिडिल ईस्ट में अमेरिका के रणनीतिक सहयोगी की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

    अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह डील अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप है।

    डील में क्या-क्या शामिल है

    इस डील के तहत इजरायल को 12,000 BLU-110A/B सामान्य प्रयोजन वाले 1,000 पाउंड के हवाई बम दिए जाएंगे। इसके अलावा इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सहायता जैसी सेवाएं भी इस पैकेज का हिस्सा होंगी।

    नीचे तालिका में इस सैन्य पैकेज की प्रमुख जानकारी दी गई है-

    घटक

    विवरण

    कुल डील वैल्यू

    151.8 मिलियन डॉलर

    मुख्य हथियार

    12,000 BLU-110A/B बम

    बम का वजन

    1,000 पाउंड (लगभग 453 किलोग्राम)

    अतिरिक्त सहायता

    इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी सेवाएं

    मुख्य ठेकेदार

    रेपकॉन यूएसए (टेक्सास)

    प्रक्रिया

    आपातकालीन मंजूरी

    इन बमों का इस्तेमाल आमतौर पर सटीक हवाई हमलों में किया जाता है और इन्हें आधुनिक फाइटर जेट्स से गिराया जाता है।

    आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल क्यों किया गया

    आमतौर पर अमेरिका में किसी भी हथियार सौदे को मंजूरी देने से पहले कांग्रेस की समीक्षा जरूरी होती है। लेकिन इस बार सरकार ने Arms Export Control Act के तहत मिली आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया।

    इसका मतलब है कि, सामान्य संसदीय समीक्षा प्रक्रिया को टाल दिया गया। हथियारों की बिक्री को तुरंत मंजूरी दी गई। आपात सुरक्षा जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि, इजरायल की सुरक्षा स्थिति बेहद गंभीर है, इसलिए लंबी प्रक्रिया का इंतजार करना संभव नहीं था।

    यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट में जंग तेज: ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले, ट्रंप बोले– ईरान के नए नेता के चयन में भी होगी अहम भूमिका

    क्षेत्रीय स्थिरता पर क्या असर होगा

    विशेषज्ञों का मानना है कि, अमेरिका द्वारा इजरायल को दिया गया यह सैन्य पैकेज युद्ध को और तीखा बना सकता है। मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बदल सकता है, वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा सकता है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

    मिडिल ईस्ट जंग का आठवां दिन

    मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। यह टकराव 28 फरवरी को तेहरान में हुए बड़े हमले के बाद शुरू हुआ था। शुरुआती हवाई हमलों के बाद अब यह संघर्ष कई मोर्चों पर फैल चुका है।

    अब इसमें हवाई हमले, ड्रोन हमले, नौसैनिक गतिविधियां और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव शामिल हैं। इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है।

    ट्रंप का सख्त संदेश

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि, तेहरान के साथ बातचीत तभी होगी जब ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण करेगा। पिछले एक सप्ताह में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है।

    यह भी पढ़ें: ट्रंप की चेतावनी- बिना शर्त सरेंडर के अलावा कोई समझौता नहीं, दिया नया नारा 'Make Iran Great Again'

    तेल बाजार पर पड़ा असर

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर युद्ध लंबा खिंचा तो ऊर्जा कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    रूस पर लगा ईरान की मदद का आरोप

    इस युद्ध के बीच एक नई भू-राजनीतिक स्थिति भी सामने आई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ईरान को खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी, युद्धपोतों की लोकेशन और सैन्य विमानों की गतिविधियां जैसी सूचनाएं ईरान के साथ साझा कर रहा है। हालांकि, रूस ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    पेंटागन का जवाब

    अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका इस स्थिति पर पूरी तरह नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका को पता है कि कौन किससे संपर्क में है। अगर अमेरिकी हितों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

    Featured News

    ईरान का अमेरिका पर आरोप

    ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि, ईरान पर हमले अरब देशों की जमीन से किए जा रहे हैं। इन हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि, ईरान की प्रतिक्रिया सीधे अमेरिकी ठिकानों और संस्थानों को निशाना बनाएगी।

    भारत में रुका ईरान का युद्धपोत

    इस युद्ध के बीच एक दिलचस्प घटनाक्रम भारत में भी सामने आया है। ईरान का युद्धपोत IRIS लावन फिलहाल कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है।

    वजह

    • जहाज में तकनीकी खराबी आ गई थी।
    • ईरान ने भारत से मदद मांगी।
    • भारत ने 1 मार्च को डॉकिंग की अनुमति दी

    जहाज 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा और इसके 183 क्रू मेंबर भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।

    जंग से जुड़े बड़े अपडेट

    अब तक युद्ध में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं-

    • ईरान में 1300 से ज्यादा हमले
    • 14 मेडिकल सेंटर निशाना बने
    • 1332 लोगों की मौत
    • 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट होने का दावा
    • लेबनान में 5 लाख लोग बेघर

    इसके अलावा ईरान ने अब तक 13 देशों को निशाना बनाया है। इनमें इजरायल, UAE, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया, तुर्किए और अजरबैजान शामिल हैं।

    जंग की शुरुआत कैसे हुई  

    तारीख

    घटना

    23 फरवरी

    ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत

    28 फरवरी

    तेहरान पर बड़ा हमला

    2 मार्च

    अमेरिका ने B-2 बॉम्बर्स से हमला

    3 मार्च

    कई देशों में अमेरिकी दूतावास बंद

    6 मार्च

    तेल कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल पहुंची

    इन घटनाओं ने पूरे मिडिल ईस्ट को सैन्य तनाव के बड़े दौर में धकेल दिया है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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