अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ तब देखने को मिला, जब हिंद महासागर के छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से अहम देश मालदीव ने अमेरिका को कूटनीतिक झटका दे दिया। जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर हाल ही में मालदीव दौरे पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें वहां एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ा।
राष्ट्रपति मुइज्जू का मुलाकात से इनकार
23 मार्च को हुए इस दौरे के दौरान राजदूत की मालदीव सरकार के कई मंत्रियों से मुलाकात हुई, लेकिन राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने आखिरी समय पर उनसे मिलने से इनकार कर दिया।
बताया गया कि जब अमेरिकी दूत ने दोबारा बैठक का समय मांगा, तो मालदीव सरकार ने प्राइवेट मीटिंग का प्रस्ताव दिया। हालांकि, राजदूत सर्जियो गोर ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और बिना राष्ट्रपति से मिले ही वापस भारत लौट आए।
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‘प्राइवेट मीटिंग’ पर अड़ा विवाद
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी पक्ष औपचारिक बैठक चाहता था, जबकि मालदीव की ओर से निजी मुलाकात का विकल्प दिया गया। इसे प्रोटोकॉल के लिहाज से उचित न मानते हुए अमेरिकी राजदूत ने मुलाकात से ही इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास के तौर पर देखा जा रहा है।
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ईरान मुद्दे से जुड़ा हो सकता है फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के रुख से जुड़ा हो सकता है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति मुइज्जू इस संघर्ष के खिलाफ हैं और इसी कारण उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि से दूरी बनाई। साथ ही, यह भी चर्चा है कि वे बाहरी दबाव से बचने के लिए फिलहाल सीमित मुलाकातें ही कर रहे हैं।
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घरेलू राजनीति भी बनी वजह
- मालदीव के भीतर भी राजनीतिक हालात इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
- राष्ट्रपति मुइज्जू की लोकप्रियता हाल के महीनों में तेजी से घटी है। नगर निगम चुनावों में उनकी पार्टी PNC को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विपक्षी दल MDP ने सभी पांच मेयर पदों पर जीत दर्ज की।
- इसके अलावा, संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव एक साथ कराने के उनके प्रस्ताव को भी देश की करीब 60 फीसदी जनता ने खारिज कर दिया।
- आर्थिक संकट से जूझ रहा मालदीव
- राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ मालदीव इस समय गंभीर आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है। देश पर भारी कर्ज का बोझ है और आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। ऐसे में, राष्ट्रपति मुइज्जू का यह कदम अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।