Hormuz Blockade :'जंगलराज' नहीं चलने देंगे, होर्मुज नाकेबंदी पर चीन ने अमेरिका को जमकर फटकारा...

ईरान और अमेरिका के बीच 11 अप्रैल को हुई बातचीत किसी फैसले पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाया। इस फैसले की ईरान पहले ही आलोचना कर चुका है
'जंगलराज' नहीं चलने देंगे, होर्मुज नाकेबंदी पर चीन ने अमेरिका को जमकर फटकारा...
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बीजिंग/वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने वैश्विक राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ईरान के साथ शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू कर दी, जिस पर अब चीन ने करारा जवाब दिया है। जिसने एक बार फिर अमेरिका को अपने फैसले पर सोचनो को मजबूर किया है।

    अमेरिकी नाकेबंदी पर ये बोले जिनपिंग

    चीन ने अमेरिका की इस कार्रवाई को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है। बीजिंग का कहना है कि इस कदम से क्षेत्र में पहले से चल रहा तनाव और बढ़ेगा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह की कार्रवाई से न केवल हालात बिगड़ेंगे, बल्कि वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा भी प्रभावित होगी।

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    दुनिया को जंगलराज की ओर नहीं जाने देंगे- जिनपिंग

    शी जिनपिंग ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका को खुलकर घेरा। उन्होंने कहा कि दुनिया को जंगलराज के कानून की ओर नहीं जाने दिया जा सकता, जहां ताकतवर देश अपनी मर्जी थोपते हैं।

    जिनपिंग ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नियमों और बहुपक्षीय सहयोग के आधार पर चलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और स्पेन जैसे देश वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए साथ खड़े हैं।

    चीन- टैरिफ लगाया तो जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहे

    इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया कि वह ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े हथियार दे रहा है। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बीजिंग ने साफ कहा कि अगर इन आरोपों के आधार पर अमेरिका चीनी उत्पादों पर 50% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो चीन भी जवाबी कार्रवाई करेगा।

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    वहीं, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया जा रहा है कि चीन जल्द ही ईरान को नए रक्षा उपकरण उपलब्ध करा सकता है या कुछ सप्लाई पहले ही भेजी जा चुकी है।

    फेल रही इस्लामाबाद वार्ता!

    ईरान और अमेरिका के बीच 11 अप्रैल को हुई बातचीत किसी फैसले पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाया। इस फैसले की ईरान पहले ही आलोचना कर चुका है और अब चीन के खुलकर विरोध में आने से यह मुद्दा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर हो गया है।

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    विशेषज्ञ बोले- दुनियाभर की सप्लाई में बुरा असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की नाकेबंदी का सीधा असर दुनिया की तेल सप्लाई और व्यापार पर पड़ सकता है। चीन ने भी चेतावनी दी है कि यह कदम पहले से नाजुक स्थिति में चल रहे सीजफायर प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकता है और क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकता है।

    कुल मिलाकर, अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद अब मिडिल ईस्ट का संकट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि इसमें वैश्विक ताकतों का टकराव भी खुलकर सामने आ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्थिति और जटिल हो सकती है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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