यह नाव बांग्लादेश के टेक्नाफ से मलेशिया के लिए रवाना हुई थी, जिसमें करीब 280 लोग सवार थे। खराब मौसम और अधिक भीड़ के चलते नाव समुद्र में डूब गई। इस घटना ने एक बार फिर रोहिंग्या शरणार्थियों की स्थिति और उनके सामने खड़ी चुनौतियों को उजागर कर दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नाव चार अप्रैल को टेक्नाफ से रवाना हुई थी और इसमें लगभग 280 लोग सवार थे। यात्रा के दौरान तेज हवाएं, ऊंची लहरें और नाव में जरूरत से ज्यादा लोगों की मौजूदगी हादसे की बड़ी वजह बनी। समुद्र के बीच संतुलन बिगड़ने के बाद नाव पलट गई और सैकड़ों लोग पानी में बह गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार करीब 250 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इस हादसे ने एक बार फिर अवैध तरीके से समुद्री यात्रा करने के खतरों को सामने ला दिया है।
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हादसे के बाद बचाव कार्य शुरू किया गया, जिसमें कुछ लोगों को रेस्क्यू कर समुद्र से जिंदा निकाला गया। बांग्लादेश से जा रहे एक जहाज ने समुद्र में तैर रहे नौ लोगों को बचाया, जिन्हें बाद में तटरक्षक बल को सौंप दिया गया। बचाए गए लोगों में शामिल एक शख्स ने बताया कि उन्हें मलेशिया में काम दिलाने का झांसा देकर नाव पर बैठाया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान हालात बेहद खराब थे और नाव पलटने के बाद वे कई घंटों तक समुद्र में तैरते रहे। यह घटना मानव तस्करी के नेटवर्क को उजागर करती है।
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इस हादसे पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जताते हुए इसे रोहिंग्या समुदाय के लंबे समय से जारी विस्थापन का नतीजा बताया है। एजेंसी ने कहा कि जब तक म्यांमार में उनके विस्थापन के मूल कारणों को दूर नहीं किया जाएगा, ऐसे हादसे होते रहेंगे। यूएन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि रोहिंग्या शरणार्थियों को सुरक्षित और स्वेच्छा से उनके घर लौटने का रास्ता बनाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि मौजूदा हालात में शरणार्थी बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं, जिससे वे जोखिम भरे रास्ते अपनाने को मजबूर हो जाते हैं।