US-Iran Talks End In Switzerland:ट्रंप की धमकी से भड़का टकराव, ईरानी डेलिगेशन ने बीच में किया वॉकआउट, रातभर के ड्रामे के बाद आई खुशखबर

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अहम वार्ता रातभर के हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच उलझ गई। ट्रंप की कड़ी टिप्पणी के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कुछ समय के लिए बातचीत से वॉकआउट कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थता कर दोनों पक्षों को फिर से बातचीत की मेज पर लौटने के लिए राजी किया।
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ट्रंप की धमकी से भड़का टकराव, ईरानी डेलिगेशन ने बीच में किया वॉकआउट, रातभर के ड्रामे के बाद आई खुशखबर

महीनों से पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। युद्ध, हमले और राजनीतिक टकराव के बीच अब शांति की एक नई कोशिश सामने आई है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम दौर की बातचीत हुई है, जिसमें मध्यस्थ देशों कतर और पाकिस्तान ने भी भूमिका निभाई। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य है अंतिम समझौते तक पहुंचना।

बातचीत की शुरुआत

स्विट्जरलैंड में रविवार को शुरू हुई इस वार्ता से पहले माहौल काफी गर्म था। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति और वरिष्ठ डिप्लोमैटिक टीम मौजूद रही। ईरान ने भी अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजा। कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में रहे।  शुरुआत में ही संकेत मिल गए कि यह आसान बातचीत नहीं होगी। लेबनान में चल रहे संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच पुराने तनाव ने माहौल को भारी बना दिया।

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ट्रंप की धमकी से और बढ़ा तनाव

बातचीत के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सख्त बयान सामने आया। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके समर्थक समूहों को नहीं रोका गया, तो अमेरिका और बड़ा हमला कर सकता है। इस बयान का असर तुरंत दिखा ईरानी प्रतिनिधिमंडल नाराज हो गया, बातचीत बीच में रुकने जैसी स्थिति बन गई और एक समय पर ईरानी डेलिगेशन मीटिंग हॉल से बाहर निकल गया। ईरान ने पलटवार करते हुए कहा कि धमकियों से उनकी नीति नहीं बदलेगी और उनकी सेना किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।

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कतर और पाकिस्तान का डिप्लोमैटिक बैलेंस

जब बातचीत टूटने की कगार पर पहुंची, तब कतर और पाकिस्तान ने बीच में आकर स्थिति संभालने की कोशिश की। दोनों देशों ने ईरान को फिर से बातचीत में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश की। तनाव को कम करने के लिए बैकचैनल डिप्लोमेसी का इस्तेमाल किया गया। 

60 दिनों का रोडमैप: क्या है बड़ा प्लान?

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी समझौते पर सहमति बनी है, जिसके तहत 60 दिन का लक्ष्य है। दोनों देश 60 दिनों के भीतर एक फाइनल डील पर पहुंचने की कोशिश करेंगे।

  • परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा- अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे। ईरान अपने परमाणु अधिकारों पर किसी भी तरह की रोक को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है। 
  • एक कम्युनिकेशन लाइन की स्थापना- दोनों देशों ने एक कम्युनिकेशन लाइन बनाने पर सहमति जताई है ताकि होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी टकराव से बचा जा सके।
  • डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल- लेबनान और आसपास के इलाकों में सैन्य टकराव रोकने के लिए एक विशेष समन्वय तंत्र बनाने की बात हुई है।

प्रतिबंध और संपत्तियों पर बातचीत

वार्ता के पहले राउंड में कुछ आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने की मांग की है। तेल सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने और कतर में फंसे लगभग 6 अरब डॉलर के फंड पर चर्चा हुई। ईरान ने दावा किया कि तेल निर्यात पर आंशिक राहत का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। अगर यह लागू होता है, तो यह ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है।

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लेबनान और इजरायल फैक्टर

इस पूरे प्रोसेस के बीच लेबनान में हालात ने तनाव और बढ़ा दिया। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है और इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी मौजूदगी बनाए रखने की बात कही है, तो वहीं किसी भी पक्ष ने स्विट्जरलैंड वार्ता में हिस्सा नहीं लिया। इस वजह से यह आशंका बनी हुई है कि जमीनी संघर्ष इस बातचीत को प्रभावित कर सकता है।

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान का बयान

पाकिस्तान और कतर की लगातार मध्यस्थता से लेबनान युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। ईरान के लिए तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी रोक हटा दी गई है, नाकेबंदी खत्म कर दी गई है, कुछ फ्रीज़ की गई संपत्ति जारी कर दी गई है और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू की गई है।

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अमेरिका का रुख- सख्ती के साथ डील की कोशिश

अमेरिकी पक्ष का कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं मिलेगी।  पुरानी दुश्मनी को पीछे छोड़कर नई शुरुआत की संभावना है। लेकिन शर्तों के साथ समझौता करें। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अमेरिकी प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि बातचीत मुश्किल जरूर है, लेकिन बंद नहीं हुई है।

ईरान का स्टैंड: दबाव नहीं चाहिए

ईरान की तरफ से भी कड़ा संदेश दिया गया  किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। देश के विकास और परमाणु अधिकारों से समझौता नहीं होगा। धमकियों का जवाब कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर दिया जाएगा। 

इजरायल की चेतावनी

उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सैनिक दक्षिणी लेबनान में जब तक जरूरत होगी तब तक रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। वहीं रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा।

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Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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