India-US Trade News :अमेरिका ने भारत पर लगाया 10% एक्स्ट्रा टैरिफ, जानिए किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर और क्या है सेक्शन 301

वॉशिंगटन डीसी। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों के बीच एक नया मोड़ आ गया है। अमेरिकी सरकार ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े उत्पादों पर सख्ती बढ़ाते हुए भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की जांच के बाद लिया गया है और शुक्रवार से प्रभावी हो चुका है। हालांकि भारत को प्रस्तावित 12.5% की बजाय 10% टैरिफ मिला है, लेकिन इसका असर भारतीय निर्यातकों और कई बड़े उद्योगों पर पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत 60 व्यापारिक साझेदार देशों की समीक्षा की। जांच का केंद्र उन देशों की नीतियां थीं, जहां से आने वाले सामान की सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी (Forced Labour) का खतरा माना गया। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका ने 60 देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
भारत को 10% टैरिफ क्यों मिला?
शुरुआत में भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। लेकिन बाद में भारत सरकार की ओर से श्रम मानकों, सप्लाई चेन की निगरानी और श्रमिक अधिकारों से जुड़े कुछ सुधारों के बाद अमेरिका ने भारत को राहत दी।
अमेरिकी पक्ष का मानना है कि, भारत ने विदेशी व्यापार नीति में बदलाव कर श्रमिक अधिकारों की निगरानी, नियमों के पालन और सप्लाई चेन की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं। इसी आधार पर भारत का प्रस्तावित टैरिफ घटाकर 10% कर दिया गया।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि, भारत को पूरी छूट मिल गई है। अमेरिका अब भी चाहता है कि भारत फोर्स्ड लेबर से जुड़े नियमों को और प्रभावी तरीके से लागू करे।
किन देशों पर कितना टैरिफ लगाया गया?
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टैरिफ |
देश |
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10% |
भारत, ब्रिटेन, कनाडा, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मेक्सिको, मलेशिया, अर्जेंटीना समेत 17 देश |
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12.5% |
अन्य 43 व्यापारिक साझेदार देश |
सेक्शन 301 क्या है?
सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक अहम प्रावधान है। यह अमेरिकी सरकार को किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच करने और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार देता है।
सेक्शन 301 के तहत अमेरिका क्या कर सकता है?
- अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है।
- आयात पर प्रतिबंध लगा सकता है।
- व्यापारिक प्रतिबंध लागू कर सकता है।
- अन्य जवाबी आर्थिक कदम उठा सकता है।
USTR ने इस बार क्या जांच की?
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बिंदु |
जानकारी |
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जांच की शुरुआत |
12 मार्च 2026 |
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कुल मामले |
60 |
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मुख्य फोकस |
फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पाद |
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कार्रवाई |
10% से 12.5% अतिरिक्त टैरिफ |
फोर्स्ड लेबर क्या होती है?
फोर्स्ड लेबर यानी ऐसी मजदूरी जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराया जाए। इसमें शामिल हो सकते हैं-
- धमकी देकर काम कराना।
- कर्ज के बदले जबरन मजदूरी।
- वेतन रोकना।
- पासपोर्ट या दस्तावेज जब्त करना।
- नौकरी छोड़ने की अनुमति न देना।
- हिंसा या डर का इस्तेमाल।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है।
भारत के किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ का असर उन उद्योगों पर अधिक पड़ सकता है जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता ज्यादा है।
संभावित प्रभावित सेक्टर
- टेक्सटाइल और गारमेंट्स
- जेम्स एंड ज्वेलरी
- लेदर उद्योग
- कृषि एवं खाद्य उत्पाद
- इंजीनियरिंग गुड्स
- केमिकल्स
- मैन्युफैक्चरिंग उत्पाद
इन उत्पादों की कीमत अमेरिका में बढ़ सकती है, जिससे भारतीय कंपनियों को ऑर्डर कम मिलने, कीमत घटाने के दबाव और प्रतिस्पर्धा बढ़ने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या सभी भारतीय उत्पाद प्रभावित होंगे?
नहीं। कुछ उत्पाद पहले से अलग सेक्टोरल टैरिफ के दायरे में हैं और उन पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा। इनमें शामिल हैं-
- स्टील
- एल्युमिनियम
- कुछ ऊर्जा उत्पाद
- उर्वरक
- USMCA समझौते के तहत आने वाला व्यापार
अमेरिका-भारत व्यापार कितना बड़ा है?
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व्यापार |
अनुमानित मूल्य |
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कुल द्विपक्षीय व्यापार |
लगभग ₹11 लाख करोड़ |
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भारत से अमेरिका निर्यात |
₹7.35 लाख करोड़ |
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अमेरिका से भारत आयात |
₹3.46 लाख करोड़ |
भारत अमेरिका को क्या निर्यात करता है?
- फार्मास्यूटिकल्स
- टेलीकॉम डिवाइस
- ज्वेलरी
- पेट्रोलियम उत्पाद
- रेडीमेड गारमेंट्स
अमेरिका भारत को क्या निर्यात करता है?
- कच्चा तेल
- पेट्रोलियम
- कोयला
- हीरे
- विमान एवं एयरोस्पेस पार्ट्स
पहले भी कई देशों पर हो चुकी है कार्रवाई
फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर अमेरिका पहले भी कई देशों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। सबसे ज्यादा कार्रवाई चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कॉटन, सोलर पैनल और टमाटर उत्पाद पर की गई थी। इसके अलावा समुद्री खाद्य, पाम ऑयल, रबर, कोको, टेक्सटाइल और खनन उद्योग भी अमेरिकी जांच के दायरे में आ चुके हैं।
क्या भारत पर व्यापारिक दबाव बढ़ेगा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 10% टैरिफ से भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है। इससे अमेरिकी खरीदार वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं या भारतीय कंपनियों से कीमत कम करने की मांग बढ़ सकती है। हालांकि भारत को 12.5% के बजाय 10% टैरिफ मिलना इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि श्रम मानकों और सप्लाई चेन में सुधार के लिए उठाए गए कदमों को अमेरिका ने आंशिक रूप से स्वीकार किया है।











