सीनेट वोटिंग के बाद मचा हड़कंप!67 साल बाद फिर भड़का अमेरिका-क्यूबा विवाद!

वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। खबरों के मुताबिक अमेरिकी सीनेट में एक अहम वोटिंग हुई है, जिसमें राष्ट्रपति को क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से जुड़ी राजनीतिक मंजूरी मिलने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इस प्रस्ताव को रोकने की कोशिश विपक्ष ने की थी, लेकिन वह 51-47 के मतों से असफल हो गई।
सीनेट में क्या हुआ?
अमेरिकी सीनेट में क्यूबा को लेकर एक प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस प्रस्ताव का उद्देश्य था संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकना, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। रिपब्लिकन सांसदों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, दो डेमोक्रेट सीनेटर मतदान में अनुपस्थित रहे।
कुल वोट: 51-47 के अंतर से प्रस्ताव असफल
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तनाव की असली वजह क्या?
खबरों में दावा किया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स में क्यूबा पर रूस और चीन के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन ने क्यूबा को क्षेत्रीय खतरा (regional threat) के रूप में देखा है। इन दावों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
अमेरिका-क्यूबा विवाद का इतिहास
यह विवाद नया नहीं है। इसकी जड़ें इतिहास में काफी गहरी हैं।
- 1959 की क्रांति- क्यूबा में फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित सरकार को हटाकर कम्युनिस्ट शासन स्थापित किया। यही वह मोड़ था जहां से दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ने शुरू हुए।
- 1960 का आर्थिक टकराव- कास्त्रो सरकार ने कई अमेरिकी कंपनियों और चीनी मिलों का राष्ट्रीयकरण किया। इसके जवाब में अमेरिका ने क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए।
शीत युद्ध का दौर- क्यूबा ने सोवियत संघ के साथ संबंध मजबूत किए। इससे अमेरिका और भी सतर्क हो गया। - 1962 का मिसाइल संकट- यह इतिहास का सबसे खतरनाक मोड़ माना जाता है, जब क्यूबा में सोवियत मिसाइलें तैनात होने की खबरों से दुनिया परमाणु युद्ध के करीब पहुंच गई थी।
- 1982 का निर्णय- रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ने क्यूबा को आतंकवाद प्रायोजक देश
की सूची में शामिल कर दिया, जिससे तनाव और गहरा गया।
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टिम केन का बयान क्यों चर्चा में है?
सीनेट में दिए गए उनके भाषण ने इस पूरे विवाद को नैतिक बहस में बदल दिया। उन्होंने साफ कहा अगर कोई भी देश अमेरिका के साथ वही करता जो हम क्यूबा के साथ कर रहे हैं, तो हम इसे युद्ध का कार्य मानेंगे। यह बयान अब राजनीतिक हलकों में बड़े सवाल खड़े कर रहा है।











