ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने अमेरिकी नाकेबंदी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां होर्मुज स्ट्रेट में सख्त नाकेबंदी की बात कर रहे हैं। वहीं इसी बीच एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर का वहां से गुजरना चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना बताती है कि जमीन पर हालात उतने सख्त नहीं हैं, जितना दावा किया जा रहा है। शिपिंग डेटा के अनुसार यह टैंकर न सिर्फ होर्मुज पार कर गया बल्कि खाड़ी से बाहर भी निकल गया, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि व्यापार पूरी तरह थमा नहीं है।
ताजा जानकारी के मुताबिक रिच स्टारी नाम का एक चीनी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया। खास बात यह है कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आता है। इसके बावजूद इसका गुजरना इस बात की ओर इशारा करता है कि नाकेबंदी पूरी तरह प्रभावी नहीं है। शिपिंग ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के डेटा से यह भी सामने आया है कि नाकेबंदी शुरू होने के बाद यह पहला जहाज है, जिसने इस रास्ते को पार किया। इससे अमेरिकी दावों की सख्ती पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि यह टैंकर करीब 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लेकर जा रहा था। यह एक मीडियम साइज का जहाज है, जो संयुक्त अरब अमीरात के हमरियाह पोर्ट से लोड होकर निकला था। इस जहाज पर चीनी चालक दल मौजूद था और इसका मालिक भी एक चीनी शिपिंग कंपनी है, जिस पर पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं। इसके बावजूद जहाज का सुरक्षित निकल जाना कई सवाल खड़े करता है।
सिर्फ एक ही नहीं बल्कि एक और प्रतिबंधित टैंकर “मुरलीकिशन” भी होर्मुज क्षेत्र में दाखिल हुआ है। यह जहाज फिलहाल खाली बताया जा रहा है और अनुमान है कि यह 16 अप्रैल को इराक से तेल लोड करेगा। इस जहाज का पुराना नाम एमकेए था और यह पहले रूसी और ईरानी तेल के परिवहन में इस्तेमाल होता रहा है। ऐसे में इस टैंकर की गतिविधि भी अमेरिकी रणनीति के लिए चुनौती मानी जा रही है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने हाल ही में ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया था, जिसके बाद तेहरान ने कड़ा विरोध जताया। ईरान का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है जबकि अमेरिका इसे अपनी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बता रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती खींचतान ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे वैश्विक बाजार को प्रभावित करता है। फिलहाल कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो कीमतों में और उछाल आ सकता है।
तनाव के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में हुई वार्ता सफल नहीं हो पाई, लेकिन दोनों पक्ष अभी भी समाधान तलाशने में लगे हुए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि बातचीत के रास्ते खुले हैं और जल्द ही दूसरा दौर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 16 अप्रैल को फिर से वार्ता होने की संभावना है।
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इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है लेकिन अमेरिका ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा, जिसमें ईरान को परमाणु हथियार रखने की छूट मिले। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका अपने रुख पर कायम है और किसी भी कीमत पर अपने हितों से समझौता नहीं करना चाहता।
चीनी टैंकर का होर्मुज पार करना यह संकेत देता है कि अमेरिकी नाकेबंदी उतनी सख्त नहीं है, जितना दावा किया जा रहा है। अगर प्रतिबंधित जहाज भी आसानी से इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह अमेरिका की रणनीति पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आने वाले समय में और बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है।