अब लाइब्रेरी भी होगी ‘स्मार्ट मॉल’जैसी :बिना स्कैन किए बुक निकाली तो गेट पर बजेगा सायरन

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। आपने अक्सर बड़े शॉपिंग मॉल्स या कपड़ों के शोरूम में देखा होगा कि कपड़ों पर एक विशेष प्लास्टिक टैग लगा होता है। यदि कोई ग्राहक बिना बिलिंग कराए उस सामान को लेकर गेट से बाहर निकलने की कोशिश करता है, तो वहां लगा अलार्म जोर-जोर से बजने लगता है और सुरक्षाकर्मी सतर्क हो जाते हैं। ठीक कुछ इसी तरह की हाईटेक तकनीक अब किताबों की सुरक्षा के लिए जिले के पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. महाकौशल कॉलेज की लाइब्रेरी में नजर आने वाली है। संभाग का संभवत: यह इकलौता ऐसा सरकारी कॉलेज बनने जा रहा है, जहां किताबों को अब ‘डिजिटल सुरक्षा कवच’ पहनाया जाएगा।
चोरी पर लगाम, गेट पर होंगे स्मार्ट सेंसर
कॉलेज प्रबंधन के अधिकारी प्रो. अरुण शुक्ला ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका सुरक्षा तंत्र है। लाइब्रेरी के मुख्य द्वार पर आरएफआईडी सेंसर गेट लगाए जाएंगे। यदि कोई छात्र या व्यक्ति किसी किताब को बिना 'इश्यू' कराए या बिना एंट्री किए बाहर ले जाने का प्रयास करेगा तो गेट पर लगा अलार्म बजना शुरू हो जाएगा। यह तकनीक न केवल किताबों की चोरी रोकेगी, बल्कि इससे किताबों के खोने का डर भी खत्म हो जाएगा।
प्रस्ताव को आकार देने 8 लाख के बजट की जरूरत
पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के इस आधुनिक कदम से छात्रों को भी काफी सुविधा होगी। इस प्रोजेक्ट के लिए कॉलेज प्रबंधन ने 8 लाख रुपए का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया है। विभाग से मंजूरी मिलते ही चिप लगाने और सेंसर गेट इंस्टॉल करने का काम शुरू हो जाएगा।
80 हजार किताबों पर लगेगी डिजिटल चिप
कॉलेज की लाइब्रेरी की इंचार्ज संघप्रिया त्रिपाठी ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन ने अपनी लाइब्रेरी को पूरी तरह से स्मार्ट बनाने का फैसला किया है। इसके तहत लाइब्रेरी में मौजूद लगभग 80 हजार किताबों पर आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी) चिप लगाई जाएगी। यह एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक चिप होगी, जिसमें किताब की जानकारी का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। अब तक लाइब्रेरी में मैन्युअल तरीके से किताबों का रिकॉर्ड रखा जाता था, लेकिन इस नई व्यवस्था के बाद पूरी लाइब्रेरी डिजिटल कंट्रोल में होगी।

तकनीक के फायदे
1- बिना किताब इश्यू कराए यदि कोई लाइब्रेरी से बाहर जाता है तो बजर सायरन की तरह बजने लगेगा।
2- सालों पुराने स्टॉक रजिस्टर पलटने की जरूरत नहीं होगी, एक क्लिक पर पता चल जाएगा कि कौन सी किताब कहां है।
3- भविष्य में छात्र खुद भी मशीन के जरिए किताबें इश्यू कर सकेंगे।
4- किताबों के लेन-देन में होने वाली मानवीय गलतियां शून्य हो जाएंगी।

जबलपुर का यह कॉलेज अब शिक्षा के साथ-साथ तकनीक के मामले में भी प्रदेश के अग्रणी संस्थानों की सूची में शामिल होने की राह पर है। लाइब्रेरी का यह 'मॉल अवतार' आने वाले समय में अन्य सरकारी कॉलेजों के लिए भी एक रोल मॉडल साबित होगा। इसका प्रस्ताव स्वीकृति के लिए विभाग को भेज दिया गया है।
प्रो. अलकेश चतुर्वेदी, प्राचार्य, लीड कॉलेज एवं पीसीओ कॉलेज जबलपुर।











