योगी सरकार का बड़ा फैसला:पंचायत चुनाव के लिए OBC आरक्षण आयोग गठित, पूर्व जज राम औतार सिंह बने अध्यक्ष

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने अहम कदम उठाया है। पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। यह आयोग पंचायतों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी और उनकी वर्तमान स्थिति का अध्ययन करेगा। आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद पंचायत चुनाव में आरक्षण की तस्वीर साफ होगी। सरकार की ओर से आयोग के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
पंचायत चुनाव से पहले सरकार का फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पंचायतों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण लागू करने से पहले आयोग का गठन जरूरी है। इसी प्रक्रिया के तहत यह नया आयोग बनाया गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक आयोग पंचायतों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी का अध्ययन करेगा। इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को देगा, जिसके आधार पर पंचायत चुनावों में आरक्षण तय किया जाएगा।
रिटायर्ड जस्टिस को मिली जिम्मेदारी
आयोग की कमान इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार Singh को सौंपी गई है। इससे पहले भी उन्हें वर्ष 2023 में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय उन्होंने पूरे प्रदेश में सर्वे और आंकड़ों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया था। सरकार ने पंचायत चुनाव में भी उनकी अनुभव क्षमता को देखते हुए दोबारा यह जिम्मेदारी दी है। राम औतार सिंह बिजनौर जिले के नजीबाबाद के रहने वाले हैं और प्रशासनिक मामलों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
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आयोग में शामिल किए गए चार सदस्य
पांच सदस्यीय आयोग में चार अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा शामिल हैं। इसके अलावा रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को भी आयोग का सदस्य बनाया गया है। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव वाले अधिकारियों की मौजूदगी से आयोग की रिपोर्ट मजबूत और संतुलित होगी। आयोग को अलग अलग जिलों में जाकर अध्ययन करने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।
छह महीने का होगा आयोग का कार्यकाल
सरकार की अधिसूचना के अनुसार आयोग का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से छह महीने तक रहेगा।आयोग को अपनी रिपोर्ट जल्द तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर सरकार आयोग का समय बढ़ा भी सकती है। प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय और सुविधाओं को लेकर अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट नियम के तहत कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत सरकार को पहले एक समर्पित आयोग बनाना होता है। आयोग यह पता लगाता है कि किसी क्षेत्र में पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति क्या है और उन्हें कितनी राजनीतिक भागीदारी मिलनी चाहिए। इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट देता है और उसी आधार पर आरक्षण की सीमा तय की जाती है। सरकार अब पंचायत चुनाव में इसी नियम का पालन कर रही है ताकि बाद में चुनाव प्रक्रिया कानूनी विवादों में न फंसे।











