UP Politics:अजीत सिंह हत्याकांड का आरोपी ‘कबूतरा’ सुभासपा में शामिल, पार्टी ने झाड़ा पल्ला

सुभासपा में शामिल होने को लेकर प्रदीप सिंह का नाम विवादों में है। ओम प्रकाश राजभर ने उनको खुद सदस्यता दिलाई, जिससे विपक्ष हमलावर हो गया है। पार्टी के भीतर ही इस मुद्दे पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। अब यह मामला कानून, राजनीति और छवि तीनों मोर्चों पर चर्चा में है।
सदस्यता से गरमाई सियासत
सुभासपा में प्रदीप सिंह कबूतरा की एंट्री ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सार्वजनिक तौर पर उन्हें सदस्यता दिलाई, जिससे यह मामला तुरंत सुर्खियों में आ गया। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दल इसे कानून व्यवस्था और नैतिकता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी इस कदम को लेकर असहजता महसूस की जा रही है। इस घटनाक्रम ने सुभासपा की रणनीति और छवि दोनों पर असर डाला है।
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अजीत सिंह हत्याकांड में नाम आया था सामने
प्रदीप सिंह ‘कबूतरा’ का नाम वर्ष 2021 में हुए अजीत सिंह हत्याकांड में सामने आया था। लखनऊ के विभूति खंड क्षेत्र में हुई इस सनसनीखेज हत्या में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने शूटरों को शरण और मदद दी थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि घटना के बाद घायल शूटर के इलाज की व्यवस्था में भी उनकी भूमिका रही। इस वजह से वह लंबे समय तक पुलिस के रडार पर रहे और उनकी तलाश कई जिलों में की गई थी। हालांकि, यह भी सच है कि अदालत में दोष सिद्ध होना अलग प्रक्रिया है, लेकिन आरोपों के चलते उनकी छवि विवादित बनी रही।
अप्रैल 2021 में आजमगढ़ कोर्ट में किया था सरेंडर
जब इस मामले में प्रदीप सिंह का नाम उछला तो पुलिस ने व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान चलाया। लखनऊ से लेकर आजमगढ़, मऊ, वाराणसी और दिल्ली तक कई जगहों पर दबिश दी गई। बताया जाता है कि उन्होंने पहले लखनऊ में सरेंडर की कोशिश की, लेकिन कड़ी निगरानी के चलते यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद अप्रैल 2021 में उन्होंने आजमगढ़ की अदालत में सरेंडर किया। इस पूरी कार्रवाई ने उन्हें उस समय प्रदेश के चर्चित आरोपियों में शामिल कर दिया था। यही पृष्ठभूमि अब उनकी राजनीतिक एंट्री को और ज्यादा विवादित बना रही है।
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पार्टी के भीतर विरोधाभासी बयान
इस पूरे मामले में सुभासपा के भीतर भी अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता अरुण राजभर ने साफ कहा कि यह नाम का भ्रम है और जिस प्रदीप सिंह की बात हो रही है वह वही व्यक्ति नहीं है। वहीं, पार्टी के अन्य नेताओं ने इस पर अनभिज्ञता जताई है और कहा कि उन्हें इस जॉइनिंग की जानकारी नहीं है। इन विरोधाभासी बयानों ने मामले को और उलझा दिया है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर समन्वय की कमी है या फिर विवाद को शांत करने की कोशिश की जा रही है।
बदलते सियासी समीकरण
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घटनाक्रम एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार के सहयोगी दल के इस कदम ने विपक्ष को हमला बोलने का मौका दिया है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक लाभ के लिए विवादित चेहरों को शामिल करना एक नई रणनीति बनती जा रही है।












