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सोशल मीडिया के प्रभाव में संन्यासी, अघोरी-पुजारी बनने घर से निकले बच्चे

डेढ़ साल में प्रदेश में ऐसे 13 बच्चों को पहुंचाया घर, 4 भोपाल में रेस्क्यू
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सोशल मीडिया के प्रभाव में संन्यासी, अघोरी-पुजारी बनने घर से निकले बच्चे

पल्लवी वाघेला-भोपाल। आमतौर पर किसी के प्रति झुकाव, परिजन की डांट या पढ़ाई का डर जैसे कारण से बच्चे घर छोड़ते हैं, लेकिन 12 वर्षीय बच्चे ने तांत्रिक क्रियाएं सीखने की चाह में घर छोड़ा। बच्चे ने भूल- भूलैया 2 और मुंज्या जैसी फिल्मों का हवाला देकर कहा कि तंत्र- मंत्र बचपन से सीखना प्रभावी होता है। सोशल प्लेटफॉर्म पर दतिया में तंत्र शास्त्र की पढ़ाई के बारे में उसे जानकारी मिली। उसे 15 दिन पहले गुजरात से दतिया जाते भोपाल में रेस्क्यू किया गया।

बीते डेढ़ साल में प्रदेश की चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए ऐसे 13 बच्चों को घर पहुंचाया गया है, जिन्होंने धार्मिक भावना से प्रभावित होकर संन्यासी, भक्त, अघोरी या पुजारी बनने के लिए घर छोड़ा। इनमें चार भोपाल में रेस्क्यू हुए। सभी सोशल मीडिया, फिल्म पर धार्मिक कंटेंट देख प्रभावित हुए थे।

अघोरी बनने का मन : 11 साल के भोपाल के स्टूडेंट को जनवरी में इंदौर से रेस्क्यू किया गया। वह अघोरी बनने उज्जैन जाने को निकला था। बच्चे ने चिट्ठी में लिखा कि जब रील्स में बाबा महाकाल का भस्म भरा रूप देखता हूं तो कुछ हो जाता है। घर में दीदी को बताया तो आप सबने डांटा, इसलिए जा रहा हूं।

बाल संत से प्रभावित

भोपाल में चार माह पहले रेस्क्यू हुई 15 वर्षीय किशोरी ने बताया कि वह इंस्टाग्राम पर साढ़े नौ लाख फॉलोअर्स वाले दिल्ली के 10 साल के बाल संत से प्रभावित है। वह साध्वी बनने महाराष्ट्र के धुले से मथुरा जाने निकली थी। परिवार ने बताया कि उनके यहां धर्म के नाम पर सिंपल पूजा-आरती से ज्यादा कुछ नहीं होता। वह खुद हैरत में हैं।

रील देख मन में बसी राधेश्याम की छबि

14 साल का किशोर हमेशा के लिए मथुरा वृंदावन में बसने तेलंगाना से निकल आया। बीते साल जून में रेस्क्यू होने पर बैग में कृष्ण भक्ति से जुड़ा सामान जैसे तस्वीर, माला, कपड़े आदि मौजूद थे। सोशल मीडिया पर वीडियो से प्रभावित बच्चा नानी की पेंशन के करीब 15 हजार रुपए लेकर निकला था।

कर्मकांड से दूर परिवार

रेस्क्यू किए बच्चों में सभी मिडिल या अपर मिडिल क्लास से हैं। परिवार ने बताया कि घर में बहुत ज्यादा धार्मिक कर्मकांड नहीं होते। वहीं, यह बात भी दिलचस्प है कि सबसे ज्यादा बच्चे यूपी के धार्मिक स्थल और उसके बाद उज्जैन, दतिया और जबलपुर जैसे शहरों में जाने घर से निकले।

बना लेते हैं छद्म दुनिया

रेस्क्यू किए बच्चों के घर से निकलने का बड़ा कारण सोशल मीडिया का प्रभाव रहा है। दरअसल, जब बच्चे सोशल मीडिया के अधिक इंफ्लूएंस में आ जाते हैं तो इमोशनल, कम्युनिकेशन और सोशल इंटेलिजेंस काफी कम हो जाता है। वह अपनी आभासी दुनिया बनाकर जीने लगते हैं। बच्चे की ऑनलाइन एक्टिविटी और बिहेवियर में बदलाव पर नजर रखें। -डॉ. दीप्ति सिंघल, मनोवैज्ञानिक

People's Reporter
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