Twisha Sharma Case :गिरिबाला तक पहुंच रही थीं केस डायरी की जानकारियां? रस्सी जब्ती में भी मिली खामी, प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल। चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच अब CBI के हाथों में है। जांच एजेंसी मामले की हर कड़ी को जोड़ने और मौत की असली वजह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इसी बीच शुरुआती पुलिस जांच को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। अदालत में पेश दस्तावेजों और परिजनों के आरोपों ने जांच प्रक्रिया पर संदेह पैदा कर दिया है। फंदे की रस्सी की जब्ती से लेकर केस से जुड़े दस्तावेजों के आरोपियों तक पहुंचने तक कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनकी अब गहन जांच की जा रही है। CBI मेडिकल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है।
पुलिस जांच की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद की गई शुरुआती जांच अब सवालों के घेरे में है। परिजनों का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसी गलतियां हुईं, जिनसे मामले की दिशा प्रभावित हो सकती थी। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों से भी यह संकेत मिला है कि जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां समय से पहले कुछ लोगों तक पहुंच रही थीं। यही वजह है कि अब पूरी जांच प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।
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फंदे की रस्सी की जब्ती पर विवाद
मामले में सबसे बड़ा सवाल उस रस्सी को लेकर उठ रहा है, जिसका इस्तेमाल फांसी लगाने में हुआ था। रिकॉर्ड के अनुसार 13 मई की सुबह रस्सी जब्त की गई थी लेकिन दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी पहचान किसने की थी। जांच से जुड़े कागजात में इस महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव पुलिस की बड़ी चूक माना जा रहा है। परिजनों के वकील का आरोप है कि रस्सी को तुरंत जांच के लिए विशेषज्ञों के पास भेजने के बजाय कुछ समय तक वाहन में रखा गया। बाद में उसे मेडिकल परीक्षण और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इसी वजह से सबूतों के संरक्षण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक कैसे पहुंचे?
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है। जिन दस्तावेजों को केस डायरी का हिस्सा माना जाता है, वे अदालत में दाखिल याचिका के साथ पेश किए गए। परिजनों का दावा है कि उस समय लोगों को इन दस्तावेजों तक पहुंच का अधिकार नहीं था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जांच से जुड़ी जानकारी बाहर कैसे पहुंची। इसी आधार पर जांच की निष्पक्षता को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।
मनोचिकित्सक से भी पूछताछ कर रही है CBI
CBI अब ट्विशा के इलाज से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। इसी क्रम में जांच एजेंसी ने उनके इलाज करने वाले मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि ट्विशा का इलाज कब और किन परिस्थितियों में हुआ था। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वास्तव में वह किसी मानसिक समस्या से जूझ रही थीं या फिर उनके मेडिकल रिकॉर्ड का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य से किया गया। डॉक्टर ने पूछताछ की पुष्टि की है, उन्होंने मरीज की गोपनीयता का हवाला देते हुए व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से इनकार किया है।
क्राइम सीन रिक्रिएशन रिपोर्ट का इंतजार
CBI मामले की वैज्ञानिक जांच पर भी विशेष ध्यान दे रही है। जांच एजेंसी आरोपी पक्ष के घर पर क्राइम सीन का रिक्रिएशन कर चुकी है। इस दौरान ट्विशा की लंबाई और वजन के अनुरूप डमी का इस्तेमाल किया गया था। जांच से जुटाए गए सभी तकनीकी आंकड़ों को विशेषज्ञ परीक्षण के लिए भेजा गया है। अब एजेंसी को रिक्रिएशन रिपोर्ट का इंतजार है। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
जेल में बढ़ाई गई गिरिबाला सिंह की सुरक्षा
इस बीच जेल प्रशासन ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत कर दी है। जानकारी के अनुसार गिरिबाला सिंह ने अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान जिन कई आरोपियों को सजा सुनाई थी, उनमें से कुछ वर्तमान में उसी जेल में बंद हैं। सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त प्रहरी और निगरानी व्यवस्था बढ़ाई गई है।
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जांच के हर पहलू पर CBI की नजर
फिलहाल CBI मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को एक साथ जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है। एजेंसी का लक्ष्य मामले से जुड़े हर तथ्य की पुष्टि करना है ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। आने वाले दिनों में रिक्रिएशन रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जांच के नतीजे इस हाई-प्रोफाइल केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।











