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Peoples Update Special :जबलपुर में बनेगा हाईटेक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर, घायल बाघ - तेंदुओं को प्राकृतिक माहौल में मिलेगा इलाज

जबलपुर में वन विहार की तर्ज पर अत्याधुनिक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर बनाया जाएगा। यहां घायल बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में उपचार और दीर्घकालिक देखभाल मिलेगी। वेटरनरी यूनिवर्सिटी ने 8 से 10 हेक्टेयर में बनने वाले इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
जबलपुर में बनेगा हाईटेक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर, घायल बाघ - तेंदुओं को प्राकृतिक माहौल में मिलेगा इलाज
जबलपुर में घायल बाघों और तेंदुओं को अब प्राकृतिक माहौल में हाईटेक इलाज मिल सकेगा।
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी भोपाल के वन विहार की तर्ज पर अब जबलपुर में अत्याधुनिक वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर विकसित किया जाएगा। इस केंद्र के शुरू होने के बाद घायल, बीमार या संकटग्रस्त बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में आधुनिक इलाज और लंबे समय तक देखभाल की सुविधा मिल सकेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (वेटरनरी यूनिवर्सिटी), जबलपुर ने तैयार कर राज्य शासन को भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार, विश्वविद्यालय के आमानाला स्थित फार्म की भूमि पर इस रेस्क्यू सेंटर का निर्माण किया जाएगा।

    8 से 10 हेक्टेयर में विकसित होगा अत्याधुनिक केंद्र

    प्रस्तावित रेस्क्यू सेंटर करीब 8 से 10 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यहां लगभग 20 बड़े प्राकृतिक इंक्लोजर बनाए जाएंगे, जिनमें 10 बाघ और 10 तेंदुओं के साथ अन्य घायल एवं बचाए गए वन्यजीवों को भी रखा जा सकेगा। इन इंक्लोजरों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वन्यजीवों को जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण मिले। इससे उपचार के दौरान उनका तनाव कम होगा और वे तेजी से स्वस्थ हो सकेंगे।

    कई टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को मिलेगा लाभ

    इस रेस्क्यू सेंटर के बनने से कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, संजय और वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व सहित आसपास के वन मंडलों से घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। वर्तमान में ऐसे वन्यजीवों को उपचार के लिए सीमित संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। नया केंद्र इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकता है।

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    भोपाल के बाद प्रदेश की दूसरी बड़ी सुविधा होगी

    फिलहाल मध्य प्रदेश में भोपाल स्थित वन विहार ही ऐसी प्रमुख जगह है, जहां घायल वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में लंबे समय तक रखा और उनका उपचार किया जाता है। जबलपुर स्थित वेटरनरी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ एंड फॉरेंसिक में वन्यजीवों का इलाज तो किया जाता है, लेकिन वहां बड़े वन्यजीवों की दीर्घकालिक देखभाल के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। इसी आवश्यकता को देखते हुए वन विभाग ने नए रेस्क्यू सेंटर की योजना तैयार की है।

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    शासन की मंजूरी मिलते ही शुरू होगी प्रक्रिया

    वेटरनरी यूनिवर्सिटी के सहायक रजिस्ट्रार रामकिंकर मिश्रा ने बताया कि शासन के निर्देश पर विश्वविद्यालय ने आमानाला फार्म की भूमि पर रेस्क्यू सेंटर विकसित करने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप वन विभाग ने रेस्क्यू सेंटर का प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय को सौंपी थी। विश्वविद्यालय के वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया तेजी से शुरू की जाएगी। रेस्क्यू सेंटर के शुरू होने के बाद मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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