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भोपाल:आयुष्मान योजना में बड़ा बदलाव, डायलिसिस मरीजों को राहत; अब फोटो से होगा वेरिफिकेशन

आयुष्मान भारत योजना के तहत डायलिसिस कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। नए पैकेज सिस्टम में अब मरीजों का सत्यापन फोटो के आधार पर भी किया जा सकेगा, जिससे बार-बार थंब इंप्रेशन लगाने की परेशानी कम होगी। राज्य सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के पैकेज सिस्टम में कई बदलाव किए हैं।
आयुष्मान योजना में बड़ा बदलाव, डायलिसिस मरीजों को राहत; अब फोटो से होगा वेरिफिकेशन
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प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों को मिलेगा। अब फोटो आधारित वेरिफिकेशन का विकल्प मिलने से मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों, झुलसे मरीजों और एंबुलेंस सेवाओं के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है।

डायलिसिस मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा

राज्य सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के पैकेज सिस्टम में कई बदलाव किए हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा नियमित डायलिसिस कराने वाले मरीजों को मिलेगा। अभी तक इलाज के दौरान कई चरणों में बायोमेट्रिक सत्यापन कराना पड़ता था। कई बार थंब मैच नहीं होने पर मरीजों को डायलिसिस के बाद दोबारा अस्पताल बुलाया जाता था।

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भोपाल में हर महीने 7000 मरीजों को जरूरत

भोपाल नेफ्रोलॉजी सोसाइटी की मंथली एनालिसिस रिपोर्ट के मुताबिक शहर में हर महीने करीब 7000 मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। इनके लिए चार सरकारी अस्पताल सहित करीब 50 प्राइवेट सेंटर में डायलिसिस किया जाता है। इन मरीजों में से लगभग 80 फीसदी मरीज आयुष्मान योजना के तहत डायलिसिस कराते हैं। ऐसे मरीजों को नई व्यवस्था का सीधा लाभ मिलेगा।

थंब इंप्रेशन की परेशानी होगी खत्म

डायलिसिस मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार अस्पताल आना पड़ता है। अब तक उन्हें चार बार थंब इंप्रेशन लगाना होता था। इसमें रजिस्ट्रेशन के दौरान पहले थंब इंप्रेशन से लेकर आखिरी थंब इंप्रेशन 8 घंटे के बाद लगता था। लेकिन अब सिर्फ डायलिसिस के दौरान फोटो खींचकर उसे आयुष्मान पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा और उसी के आधार पर मरीज का अप्रूवल मिल जाएगा।

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सड़क हादसों के लिए गोल्डन ऑवर पैकेज

डायलिसिस के साथ ही आयुष्मान योजना में पहली बार सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए गोल्डन ऑवर पैकेज जोड़ा गया है। हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे में दी जाने वाली आपात चिकित्सा सेवाओं को इसके दायरे में रखा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस अवधि में जल्द इलाज मिलने से गंभीर घायलों की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

झुलसे मरीजों और एंबुलेंस सेवा को भी लाभ

गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए अब जलने के प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग पैकेज तय किए गए हैं। 25 से 40 प्रतिशत तक जलने पर 27,750 रुपए और 60 से 80 प्रतिशत तक जलने पर 67,200 रुपए तक का पैकेज मिलेगा। वहीं बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के लिए 500 रुपए और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के लिए 1000 रुपए तक की दर निर्धारित की गई है।

मरीजों ने बताई अपनी परेशानी

रोहित नगर निवासी शर्मिला केलकर को अपने 23 साल के दिव्यांग बेटे की सप्ताह में दो बार डायलिसिस करानी पड़ती है। थंब इंप्रेशन नियम के चलते उन्हें बेटे को लेकर बार-बार अस्पताल जाने में बहुत परेशानी होती थी। वहीं 57 साल की मधु श्रीवास्तव को डायलिसिस के लिए घर से करीब 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। उनका कहना है कि डायलिसिस के बाद इतनी ज्यादा थकान हो जाती है कि बार-बार अस्पताल जाने की हिम्मत नहीं होती। इसी को लेकर मध्य प्रदेश हेल्थ कॉरपोरेशन के एमडी मयंक अग्रवाल का कहना है कि नई व्यवस्था मरीजों को सुविधा देने के साथ इलाज की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डायलिसिस मरीजों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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