Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Tirumala Temple Mystery:तिरुमाला मंदिर के गर्भगृह में क्यों नहीं बजती घंटी? सदियों पुराने रहस्य से जुड़ी है ये कहानी!

तिरुमाला बालाजी मंदिर की कई परंपराएं भक्तों को हैरान करती हैं। इन्हीं में से एक है गर्भगृह के अंदर घंटी का न होना। इसके पीछे वैष्णव संत वेदांत देशिका से जुड़ी एक दिव्य कथा और वैखानस आगम के नियमों का उल्लेख मिलता है, जो इस परंपरा को खास और रहस्यमयी बनाते हैं।
तिरुमाला मंदिर के गर्भगृह में क्यों नहीं बजती घंटी? सदियों पुराने रहस्य से जुड़ी है ये कहानी!
तिरुमाला मंदिर गर्भगृह।

आंध्र प्रदेश। दुनियाभर में प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। आमतौर पर मंदिरों के गर्भगृह में घंटियां दिखाई देती हैं लेकिन तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में छोटी घंटी नहीं रखी गई है। इस परंपरा को लेकर एक पुरानी कथा प्रचलित है, जिसमें भगवान बालाजी की दिव्य घंटी और महान वैष्णव संत वेदांत देशिका के जन्म का संबंध बताया जाता है। वहीं, मंदिर की पूजा पद्धति में लागू प्राचीन नियम भी इस परंपरा को खास बनाते हैं।

तिरुमाला गर्भगृह में क्या है घंटी नहीं होने का रहस्य?

तिरुमाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर की हर परंपरा अपने आप में अलग पहचान रखती है। इन्हीं में से एक रहस्य है कि मुख्य गर्भगृह के अंदर कोई छोटी घंटी नहीं है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता और प्राचीन पूजा व्यवस्था दोनों का संबंध बताया जाता है।

ये भी पढ़ें: रथ यात्रा का सबसे बड़ा रहस्य! आखिर 9 दिन के लिए गुंडिचा मंदिर क्यों जाते हैं भगवान जगन्नाथ, कौन थीं उनकी 'मौसी'?

संत वेदांत देशिका की कथा

लोक मान्यता के अनुसार, कई वर्षों पहले अनंत सूर्य और द्रोथम्बा नाम के एक भक्त दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिए भगवान वेंकटेश्वर की आराधना करते थे। कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और अपनी दिव्य घंटी प्रसाद के रूप में दी। मान्यता है कि भगवान ने दंपत्ति को इस घंटी को ग्रहण करने का आशीर्वाद दिया, जिसके बाद उनके घर एक दिव्य बालक का जन्म हुआ। यही बालक आगे चलकर महान वैष्णव संत वेदांत देशिका के रूप में प्रसिद्ध हुए।

मंदिर की घंटी हुई गायब, दिव्य रहस्य

कथा के अनुसार, अगले दिन जब मंदिर के कपाट खुले तो गर्भगृह की घंटी वहां नहीं थी। शुरुआत में लोगों को लगा कि घंटी चोरी हो गई है लेकिन बाद में पुजारियों को भगवान के संकेत से पता चला कि वह घंटी किसी चोरी की वजह से नहीं बल्कि एक दिव्य उद्देश्य से गई है। इसके बाद से मान्यता है कि तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में दोबारा छोटी घंटी स्थापित नहीं की गई।

वेदांत देशिका बने वैष्णव परंपरा के महान संत

वेदांत देशिका ने आगे चलकर संस्कृत और तमिल भाषा में कई धार्मिक ग्रंथों की रचना की। उन्हें वैष्णव परंपरा के सबसे बड़े विद्वानों में गिना जाता है। उनकी विद्वता और भक्ति के कारण उन्हें कई सम्मानित उपाधियां मिलीं। उनकी रचनाओं में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की स्तुति से जुड़े कई महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। भक्तों के बीच उन्हें भगवान की दिव्य घंटी का स्वरूप भी माना जाता है।

आगम शास्त्रों में भी छिपा है कारण

धार्मिक कथा के अलावा तिरुमाला मंदिर की पूजा व्यवस्था प्राचीन वैखानस आगम परंपरा के अनुसार चलती है। इस परंपरा में मंदिर के गर्भगृह, पूजा विधि और नियमों को विशेष महत्व दिया जाता है। मंदिर प्रशासन की ओर से घंटी न होने का कोई अलग आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मंदिर की प्राचीन परंपराओं के अनुसार ही गर्भगृह की व्यवस्था बनाई गई है।

ये भी पढ़ें: Sawan 2026: 30 जुलाई या 1 अगस्त कब से शुरू होंगे सावन? जाने पहले सोमवार की तीथि और इस दिन का महत्व

बाहर मौजूद हैं विशाल घंटियां

गर्भगृह के अंदर भले ही घंटी नहीं है, लेकिन मंदिर परिसर में प्रसिद्ध महामणि मंडपम मौजूद है। यहां विशाल घंटियां लगी हुई हैं, जिन्हें विशेष अवसरों पर बजाया जाता है। मान्यता है कि भगवान को भोग लगाने के समय इन घंटियों की आवाज पूरे क्षेत्र में गूंजती है। पुराने समय में इन घंटियों की आवाज दूर तक पहुंचती थी और इसे शुभ संकेत माना जाता था। तिरुमाला मंदिर की यह अनोखी परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और रहस्य का विषय बनी हुई है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...

Latest Posts