टाइगर श्रॉफ पर हमले की पहले ही रच ली थी साजिश? फुटबॉल ग्राउंड के CCTV ने बढ़ाया शक

मुंबई। अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, गोलीबारी के दौरान टाइगर श्रॉफ के तुरंत नीचे झुक जाने से उनकी जान बच गई। वहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी वारदात से करीब एक सप्ताह पहले भी घटनास्थल के आसपास पहुंचे थे। पुलिस अब हमले की पूरी साजिश, हथियारों के स्रोत और फायरिंग में इस्तेमाल गोलियों की संख्या का पता लगा रही है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्यों की मदद से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही हैं।
टाइगर श्रॉफ की कार पर कैसे हुई फायरिंग?
जानकारी के मुताबिक, रविवार शाम जुहू के पुष्पा नरसी पार्क में प्रशंसकों को अलविदा कहने के बाद टाइगर श्रॉफ अपनी BMW कार की आगे वाली सीट पर बैठे थे। इसी दौरान दो हमलावर वहां पहुंचे। एक कार के सामने खड़ा हुआ, जबकि दूसरा बाईं तरफ से आया। इसके बाद दोनों ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग शुरू होते ही टाइगर श्रॉफ अपनी सीट पर नीचे झुक गए। उनकी इस त्वरित प्रतिक्रिया से बड़ा हादसा टल गया। गोलीबारी के दौरान कार की विंडशील्ड टूट गई और उसके कांच से टाइगर को हल्की खरोंचें आईं। इस घटना में उनके ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलूच और वहां मौजूद राहगीर उमेश चौहान भी घायल हो गए। दोनों को छर्रे लगने की बात सामने आई है।
कार से मिले गोली के 10 टुकड़े, बैलिस्टिक जांच जारी
फायरिंग की घटना के बाद फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके से गोली के 10 टुकड़े बरामद किए। पुलिस के अनुसार, वारदात में देसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था। कार के अंदर भी एक गोली फंसी हुई मिली है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद टुकड़े कार से टकराकर टूटी गोलियों के हैं या फायरिंग के दौरान कोई दूसरी तकनीकी गड़बड़ी हुई थी। सभी साक्ष्यों को फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी फूलसिंह कार के सामने खड़ा था और उसने चार राउंड गोलियां चलाईं। इनमें से एक गोली विंडशील्ड को पार करके कार के अंदर गई और पिछली सीट में जा धंसी।
पुलिस मेडिकल रिपोर्ट और बैलिस्टिक विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्राइवर को इसी गोली के टुकड़े लगे थे या वह किसी दूसरी गोली के छर्रों से घायल हुआ। कार के बोनट पर भी गोली लगने की आशंका जताई गई है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
दूसरे शूटर की पिस्टल हुई जाम
पुलिस की जांच में दूसरे शूटर रेहान की भूमिका भी सामने आई है। बताया गया है कि कैप पहने रेहान ने कार के पास पहुंचकर पहली गोली चलाई, जो टाइगर की सीट के बगल वाले दरवाजे पर लगी। इसके बाद उसने दोबारा गोली चलाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पिस्तौल जाम हो गई। पुलिस इस पहलू को भी अहम मान रही है। जांच एजेंसियां हथियारों की स्थिति और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर फायरिंग का पूरा क्रम समझने में जुटी हैं।
हमले से एक सप्ताह पहले भी घटनास्थल पर पहुंचे थे आरोपी
जांच में यह भी सामने आया है कि फायरिंग के मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी 11 अक्टूबर को भी जुहू के फुटबॉल ग्राउंड के बाहर पहुंचे थे। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस को पता चला कि वे कुछ देर तक आसपास घूमते रहे थे। पुलिस को संदेह है कि आरोपी उस दिन भी टाइगर श्रॉफ पर हमला करने की योजना से पहुंचे थे, लेकिन अभिनेता के वहां खेलने नहीं आने के कारण लौट गए। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि के लिए जांच जारी है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हमले की योजना किसने बनाई, आरोपियों को हथियार किसने मुहैया कराए और इस वारदात के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
एक फोन कॉल से पुलिस को मिला अहम सुराग
वारदात के बाद आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। वे ज्यादातर समय अपने मोबाइल फोन बंद रखते थे, ताकि पुलिस उन्हें ट्रैक न कर सके। लेकिन सूरत जाने के लिए कैब बुक करते समय की गई एक फोन कॉल जांच में अहम साबित हुई। मुंबई पुलिस के मुताबिक, रविवार रात एक आरोपी ने बोरीवली रेलवे स्टेशन के बाहर से सूरत जाने के लिए कैब बुक की थी। कैब तय समय पर नहीं पहुंची तो आरोपी ने ड्राइवर को फोन किया और उसे अपनी लोकेशन बताई। इसके बाद तीनों आरोपी कैब में बैठकर सूरत के लिए रवाना हो गए। पुलिस पहले से तकनीकी जानकारी और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही थी। कैब ड्राइवर को किए गए फोन के बाद पुलिस को उसका मोबाइल नंबर मिला, जिसके जरिए जांचकर्ताओं ने ड्राइवर से संपर्क किया।
सूरत से ट्रेन में सवार हुए आरोपी
पुलिस के अनुसार, कैब ड्राइवर ने तीनों आरोपियों को सूरत बस स्टैंड के पास छोड़ा था। इसके बाद पुलिस ने वहां के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें तीनों आसपास दिखाई दिए। बताया गया है कि आरोपियों ने पहले बस का इंतजार किया, लेकिन बाद में ट्रेन से जाने का फैसला किया। रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने यह पता लगाया कि वे किस ट्रेन के किस डिब्बे में सवार हुए थे। इसके बाद मुंबई पुलिस ने राजस्थान पुलिस से संपर्क किया और आरोपियों की जानकारी साझा की।
कोटा रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी कर तीनों गिरफ्तार
मुंबई पुलिस से सूचना मिलने के बाद कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ा दी। स्टेशन के अंदर-बाहर, प्लेटफॉर्म और आने-जाने के रास्तों पर दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। कोटा की पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम के मुताबिक, ट्रेन की तलाशी के दौरान जनरल कोच में तीनों आरोपियों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें घेरकर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 18 वर्षीय फूलसिंह नरेश, 18 वर्षीय रेहान अंसारी और 20 वर्षीय ऋतिक कुमार उर्फ रोशन महतो के रूप में हुई है। फिलहाल मुंबई पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हमले की पूरी साजिश का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।




















