इस्लामाबाद। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे लंबी अहम वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गई। 40 दिनों से जारी क्षेत्रीय तनाव के बीच यह बातचीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, लेकिन दोनों देश अपने-अपने कड़े रूख सहित कई ठोस शर्तों पर अड़े रहे जिससे कोई भी हल नहीं निकल सका।
यह वार्ता लगातार करीब 21 घंटे तक चली, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रस्ताव रखे, लेकिन किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। इससे साफ हो गया कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं और जल्द समाधान आसान नहीं है।
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान ने सकारात्मक और दूरदर्शी प्रस्ताव दिए थे, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने भरोसा कायम करने में गंभीरता नहीं दिखाई।
गालिबफ ने इस वार्ता की मेजबानी के लिए पाकिस्तान का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सहयोग से ही यह महत्वपूर्ण बातचीत संभव हो पाई। साथ ही उन्होंने अपने देशवासियों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनका समर्थन किया।
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वार्ता के दौरान ईरान ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया। इसमें दो प्रमुख मांगें थीं पहली, लेबनान में तुरंत युद्धविराम लागू किया जाए। दूसरी, विदेशी बैंकों में जमा करीब 6 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज किया जाए।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना “अंतिम और सबसे बेहतर प्रस्ताव” रखा था। अमेरिका चाहता था कि ईरान साफ तौर पर यह वादा करे कि वह परमाणु हथियार क्षमता विकसित नहीं करेगा।
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सूत्रों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े ट्रांजिट और सुरक्षा मुद्दे भी बातचीत में विवाद का कारण बने। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इस पर सहमति बनना जरूरी था।
हालांकि यह वार्ता बिना नतीजे खत्म हुई है, लेकिन दोनों देशों ने कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। आने वाले समय में फिर से बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन फिलहाल क्षेत्र में तनाव बरकरार रहने के संकेत हैं।