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US- Iran Peace Talks :इस वजह से नाकाम रही इस्लामाबाद वार्ता, ईरान ने बताई ये बड़ी सख्त शर्तें, होर्मुज पर ये कहा

गालिबफ ने इस वार्ता की मेजबानी के लिए पाकिस्तान का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सहयोग से ही यह महत्वपूर्ण बातचीत संभव हो पाई। साथ ही उन्होंने अपने देशवासियों का भी धन्यवाद किया
इस वजह से नाकाम रही इस्लामाबाद वार्ता, ईरान ने बताई ये बड़ी सख्त शर्तें, होर्मुज पर ये कहा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इस्लामाबाद। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे लंबी अहम वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गई। 40 दिनों से जारी क्षेत्रीय तनाव के बीच यह बातचीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, लेकिन दोनों देश अपने-अपने कड़े रूख सहित कई ठोस शर्तों पर अड़े रहे जिससे कोई भी हल नहीं निकल सका।

    बिना नतीजे खत्म हुई 21 घंटे चली बातचीत

    यह वार्ता लगातार करीब 21 घंटे तक चली, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रस्ताव रखे, लेकिन किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। इससे साफ हो गया कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं और जल्द समाधान आसान नहीं है।

    ईरान का आरोप- अमेरिका भरोसा नहीं जीत पाया

    ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान ने सकारात्मक और दूरदर्शी प्रस्ताव दिए थे, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने भरोसा कायम करने में गंभीरता नहीं दिखाई। गालिबफ ने यह भी कहा कि बातचीत पूरी तरह विफल नहीं रही, क्योंकि अमेरिका अब ईरान के नजरिए को बेहतर समझ चुका है।

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    पाकिस्तान को दिया धन्यवाद

    गालिबफ ने इस वार्ता की मेजबानी के लिए पाकिस्तान का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सहयोग से ही यह महत्वपूर्ण बातचीत संभव हो पाई। साथ ही उन्होंने अपने देशवासियों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनका समर्थन किया।

    यह भी पढ़ें: इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होते ही ट्रंप का बड़ा बयान- ईरान को समुद्री घेराबंदी की दी खुली धमकी

    ईरान की प्रमुख मांगें

    वार्ता के दौरान ईरान ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया। इसमें दो प्रमुख मांगें थीं पहली, लेबनान में तुरंत युद्धविराम लागू किया जाए। दूसरी, विदेशी बैंकों में जमा करीब 6 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति को अनफ्रीज किया जाए। हालांकि इन मांगों पर अमेरिका ने सख्त रुख अपनाया, जिससे बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

    परमाणु मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने अपना “अंतिम और सबसे बेहतर प्रस्ताव” रखा था। अमेरिका चाहता था कि ईरान साफ तौर पर यह वादा करे कि वह परमाणु हथियार क्षमता विकसित नहीं करेगा। लेकिन इस मुद्दे पर ईरान की ओर से स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला, जो समझौते में सबसे बड़ी बाधा बन गया।

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    होर्मुज और सुरक्षा विवाद भी अहम

    सूत्रों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े ट्रांजिट और सुरक्षा मुद्दे भी बातचीत में विवाद का कारण बने। यह इलाका वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए इस पर सहमति बनना जरूरी था।

    आगे कैसे होंगे हालात?

    हालांकि यह वार्ता बिना नतीजे खत्म हुई है, लेकिन दोनों देशों ने कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। आने वाले समय में फिर से बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन फिलहाल क्षेत्र में तनाव बरकरार रहने के संकेत हैं।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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