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Bashir Badr Award :पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की याद में मध्यप्रदेश सरकार देगी साहित्यिक पुरस्कार

मप्र सरकार दिवंगत शायर पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की याद में साहित्यिक पुरस्कार शुरू करेगी। यह ऐलान प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने मंगलवार को किया। लोधी डॉ. बद्र के निवास पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
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पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र की याद में मध्यप्रदेश सरकार देगी साहित्यिक पुरस्कार

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह ने मशहूर शायर पद्मश्री डॉ बशीर बद्र के निधन उपरांत उनके ईदगाह कॉलोनी स्थित निवास पहुंचकर परिवारजनों से भेंट कर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस अवसर पर मंत्री लोधी ने बशीर बद्र साहब की पत्नी डॉ. राहत बद्र तथा पुत्र तैयब बद्र से आत्मीय चर्चा की।

बद्र साहब का साहित्य संवेदनशीलता की विरासत

चर्चा के दौरान मंत्री लोधी ने बशीर बद्र साहब की कई प्रसिद्ध ग़ज़लों और अशआर का उल्लेख करते हुए उन्हें सुनाया और कहा कि बशीर बद्र साहब का कलाम केवल साहित्य नहीं, बल्कि इंसानी जज़्बात, मोहब्बत, करुणा और संवेदनशीलता की ऐसी विरासत है जिसने पीढ़ियों को प्रभावित किया है। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा कर शासन द्वारा पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र के नाम पर एक साहित्यिक पुरस्कार स्थापित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी साहित्यिक विरासत से प्रेरणा प्राप्त करती रहें।

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शायरी में मानवीय रिश्तों की गर्माहट 

मंत्री लोधी ने कहा कि वे वर्षों से बशीर बद्र साहब को पढ़ते रहे हैं और अनेक अवसरों पर उनके शेर उद्धृत करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बशीर बद्र साहब की शायरी में मानवीय रिश्तों की गर्माहट, सामाजिक सरोकार, जीवन का दर्शन और इंसानी दर्द की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है, उनकी रचनाएँ आम आदमी के दिल से सीधा संवाद करती हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। बशीर बद्र साहब ने उर्दू शायरी को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं और उनकी रचनाएँ लोगों के दिलों में सदैव जीवंत रहेंगी।

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28 मई को हुआ इंतकाल

मशहूर शायर बशीर बद्र का इंतकाल 91 वर्ष की आयु में 28 मई को भोपाल में हुआ था। उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त् की थी।एक दौर में वे उप्र पुलिस के कर्मचारी भी रहे। इसके बाद वे यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे। 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया था। इसके बाद वे मेरठ छोड़कर भोपाल के रहवासी हो गए थे।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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