सोनम वांगचुक के अनशन की गूंज अमेरिका तक,वॉशिंगटन में प्रदर्शन; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को मिला सपोर्ट

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुग के आंदोलन को अब अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने लगा है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर दो सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन कर वांगचुक के प्रति एकजुटता जताई। प्रदर्शन के दौरान भारत सरकार से आंदोलनकारियों से बातचीत शुरू करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई।
भारतीय दूतावास के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी
शुक्रवार को अमेरिका के दो संगठन 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' और 'द आजादी प्रोजेक्ट' के कार्यकर्ता वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास के पास महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सोनम वांगचुक के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि कथित NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी उठी मांग
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस फैसले जरूरी हैं। प्रदर्शन से पहले 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र भी भेजा। पत्र में सरकार से अपील की गई कि वह आंदोलनकारियों के साथ जल्द बातचीत शुरू करे और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब दे।
'अब और इंतजार नहीं होना चाहिए'
संगठन की कार्यकारी निदेशक सुनीता विश्वनाथ ने कहा कि सरकार को अब और देर नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल संवाद शुरू किया जाना चाहिए, ताकि स्थिति और न बिगड़े। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों की बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और बातचीत ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान हो सकता है।
वांगचुक और छात्रों से भी की अपील
प्रदर्शन करने वाले संगठनों ने सिर्फ सरकार से ही नहीं, बल्कि सोनम वांगचुक और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से भी अपनी सेहत का ध्यान रखने की अपील की। संगठन ने बयान में कहा कि उनकी आवाज अब भारत की सीमाओं से निकलकर दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में अपनी मांगों को मनवाने के लिए उनकी जान जोखिम में पड़ना किसी के हित में नहीं है।
28 जून से अनशन पर हैं सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका आंदोलन कथित NEET परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शुरू हुआ था। शनिवार को लगातार बिगड़ती तबीयत के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। इस कार्रवाई के बाद आंदोलन को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई। अब अमेरिका में हुए प्रदर्शन ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना दिया है।












