इंदौर। दूर देशों में चल रही तोपों और मिसाइलों की गूँज अब इंदौर की रसोई और मंदिरों के भंडारों में साफ सुनाई देने लगी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को इस कदर झकझोर दिया है कि पेट्रोल-डीजल के बाद अब खाद्य तेलों की कीमतों में आग लग गई है।इंदौर की गलियों में इस बार हनुमान जयंती पर उत्सव तो होगा, लेकिन महँगाई के चलते कई कड़ाही सूनी रहेंगी।
युद्ध के एक महीने के भीतर ही देश में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है। व्यापारिक केंद्र सियागंज के व्यापारियों के अनुसार, सोयाबीन तेल जो पहले 140 रुपये प्रति लीटर था, वह अब 175 रुपये तक जा पहुँचा है। मूंगफली तेल में भी 40 से 50 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि अरहर की दाल और आटा जैसी बुनियादी चीजों के दाम बढ़ने से आम आदमी की थाली का गणित पूरी तरह बिगड़ गया है।
इस महँगाई और गैस की किल्लत का सबसे दुखद पहलू आगामी हनुमान जयंती पर पड़ रहा है। इंदौर, जो अपने भव्य भंडारों के लिए जाना जाता है, इस बार कुछ फीका नजर आएगा।
गैस का संकट: भंडारों में लगने वाली गैस टंकी के दाम ब्लैक में 3000 रुपये तक पहुँच गए हैं।
बजट का बोझ: तेल का डिब्बा जो 1800 रुपये में मिलता था, वह अब 2400 रुपये का हो चुका है।
आयोजकों की बेबसी: छत्री बाग के राम मंदिर और जिला कोर्ट जैसे प्रमुख स्थानों पर इस वर्ष भंडारे टाल दिए गए हैं। माणिकबाग बालाजी मंदिर के अध्यक्ष रवि चौहान बताते हैं कि दानदाताओं के हाथ खींचने और संसाधनों की कमी के कारण 4000 लोगों के भव्य भंडारे की जगह अब केवल फलिहारी खिचड़ी और नुक्ती का वितरण किया जाएगा।
"युद्ध के कारण किराना वस्तुओं, खासकर तेल के भाव में 40-45 रुपये की वृद्धि हुई है। यदि यह जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो स्थिति और विकराल हो सकती है।"
— अशोक खत्री, व्यापारी, सियागंज