नई दिल्ली। महिला आरक्षण कानून में संभावित संशोधन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे संघीय ढांचा कमजोर हो सकता है और संसद की गरिमा को ठेस पहुंच सकती है।
थरूर ने 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र से पहले आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस सत्र का इस्तेमाल राज्य चुनावों और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को 33% आरक्षण देने की समर्थक रही है और 2013 में इसी पार्टी ने यह बिल राज्यसभा से पास कराया था।
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थरूर ने खास तौर पर परिसीमन के मुद्दे को उठाया। 2023 के कानून के मुताबिक, महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना।
सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर करीब 816 करने की तैयारी में है। इससे ज्यादा आबादी वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की सीटें बढ़ेंगी। वहीं, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों को डर है कि संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। विपक्ष का कहना है कि इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है।
इस मुद्दे पर शुक्रवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में भी चर्चा हुई। बैठक में पार्टी ने सरकार के प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति जताई और इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों को साथ लाने के लिए 15 अप्रैल को एक बैठक बुलाई जा सकती है, ताकि संसद के विशेष सत्र के लिए संयुक्त रणनीति तैयार की जा सके।
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केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, सीटें बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं, जिनमें से करीब 33% यानी लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
ऐसे में महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा अब सिर्फ नीति नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन का सवाल बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासत और तेज होने के आसार हैं।