उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में यमुना नदी में हुआ नाव हादसा पूरे देश को झकझोर देने वाला है। भगवान के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं की यात्रा अचानक एक भयावह त्रासदी में बदल गई। शुक्रवार दोपहर हुए इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 लोग अभी भी लापता हैं। शनिवार को दूसरे दिन भी राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें दिन-रात लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं और शोक की लहर फैला दी है।
इस हादसे का सबसे दुखद पहलू यह है कि मृतकों में लुधियाना के जगराओं से आए एक ही परिवार के 7 सदस्य शामिल हैं। ये सभी लोग धार्मिक यात्रा पर वृंदावन आए थे। मृतकों में मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा जैसे करीबी रिश्तेदार शामिल हैं। जिनकी पहचान मधुर बहल, कविता बहल, चरणजीत, पिंकी बहल, आशा रानी, अंजू गुलाटी और राकेश गुलाटी के रूप में हुई है। एक ही परिवार के इतने लोगों की एक साथ मौत ने हर किसी को भावुक कर दिया है। उनके घरों में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे श्रद्धालुओं से भरी नाव जुगल घाट से रवाना हुई थी। नाव जैसे ही यमुना के बीच पहुंची, तेज हवाओं ने उसे असंतुलित कर दिया। बताया जा रहा है कि हवा की रफ्तार करीब 40 किमी प्रति घंटा थी। नाव डगमगाने लगी और सामने मौजूद पीपे के पुल से टकराने लगी। यात्रियों ने नाविक से नाव रोकने की अपील भी की, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। दो बार टकराने से बचने के बाद तीसरी बार जोरदार टक्कर हुई, जिससे नाव पलट गई और यात्री करीब 25 फीट गहरे पानी में गिर गए।
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हादसे के तुरंत बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस अभियान में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें शामिल हैं।
करीब 250 से अधिक जवान और अधिकारी इस अभियान में जुटे हुए हैं।
अब तक 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। वहीं लापता 5 लोगों की तलाश अभी भी जारी है।
जांच में सामने आया है कि नाव में सवार किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। यह इस हादसे की सबसे बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। नाविक पप्पू निषाद हादसे के बाद मौके से फरार हो गया था लेकिन पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। यह घटना सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।
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रेस्क्यू टीमों को यमुना नदी के तेज बहाव का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोग बहकर दूर जा सकते हैं। इसके अलावा नदी की तलहटी में जमा गाद, कीचड़ और रेत भी खोज कार्य में बाधा बन रही है। कई बार शव इन परतों में दब जाते हैं, जिससे उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है।
सभी श्रद्धालु ‘श्री बांके बिहारी क्लब’ की ओर से आयोजित चार दिवसीय यात्रा पर आए थे। उनका उद्देश्य बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करना था लेकिन यह यात्रा एक दुखद हादसे में बदल गई। जिन लोगों ने आस्था के साथ यात्रा शुरू की थी, वे अब अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे हैं।
हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से:
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की है।
इस हादसे को देखते हुए पंजाब और उत्तर प्रदेश सरकारों के बीच भी समन्वय बनाया गया है। भगवंत मान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बताया जा रहा है कि अधिकांश पीड़ित पंजाब के रहने वाले थे, इसलिए दोनों राज्यों के अधिकारी मिलकर राहत कार्य में तालमेल बना रहे हैं।