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MP में TET विवाद गहराया!शिक्षकों ने खोला मोर्चा, 29 मार्च को रणनीति बैठक; 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित

मध्यप्रदेश में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर विवाद तेजी से बढ़ता जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के नए आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में असंतोष फैल गया है और अब वे विरोध की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
शिक्षकों ने खोला मोर्चा, 29 मार्च को रणनीति बैठक; 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्यप्रदेश में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर विवाद तेजी से बढ़ता जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के नए आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में असंतोष फैल गया है और अब वे विरोध की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इस मुद्दे पर 29 मार्च को प्रदेशभर के शिक्षकों की सामूहिक बैठक होने जा रही है, जिसमें आगे के आंदोलन का फैसला लिया जाएगा।

    TET अनिवार्य करने के आदेश से बढ़ा विवाद

    DPI भोपाल के निर्देश के अनुसार, ऐसे सभी शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 साल से अधिक समय बचा है उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। आदेश में साफ कहा गया है कि जारी तारीख से 2 साल के भीतर परीक्षा पास करना जरूरी होगा, नहीं तो सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उठाया है लेकिन यही आदेश अब विवाद की बड़ी वजह बन गया है।

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    31 मार्च तक मांगी गई जानकारी

    9 मार्च को जारी आदेश में सभी जिलों से उन शिक्षकों की जानकारी मांगी गई है, जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं किया है। यह जानकारी 31 मार्च तक भेजने के निर्देश दिए गए हैं। समस्या यह है कि इस दायरे में वे शिक्षक भी शामिल हो रहे हैं जो 2005 और 2008 की भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे जब टीईटी अनिवार्य नहीं था।

    पुराने शिक्षकों में नाराजगी

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति के समय टीईटी जरूरी नहीं था तो अब इसे लागू करना गलत है। उनका तर्क है कि यह पुराने मामलों पर नए नियम लागू करने जैसा है, जो न्यायसंगत नहीं है। संगठनों के अनुसार इस फैसले से करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक 2011 से पहले नियुक्त हुए हैं।

    29 मार्च को बनेगी रणनीति

    शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल के अनुसार इस मुद्दे पर 29 मार्च को सभी शिक्षक संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में संयुक्त शिक्षक मोर्चा बनाकर आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। साथ ही टीईटी के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

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    “नीति बनाम न्याय” की स्थिति

    यह मामला अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा बल्कि “नीति बनाम न्याय” का रूप ले चुका है। विभाग का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए टीईटी जरूरी है। वहीं शिक्षक इसे अपने अधिकारों के खिलाफ बता रहे हैं

    सरकार से रिव्यू की मांग

    शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर की जाए। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा विवाद बनता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसका असर और गहरा हो सकता है।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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