नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला:CBI की बड़ी कार्रवाई, दो और आरोपी गिरफ्तार

CBI ने 24 घंटे में दो नई गिरफ्तारियां कर जांच को और तेज कर दिया है। देश के कई शहरों में छापेमारी कर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। कोर्ट ने पहले गिरफ्तार आरोपियों को 7 दिन की कस्टडी में भेजा है। री-एग्जाम के फैसले ने लाखों छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ा दिया है।
CBI की कार्रवाई तेज, दो और आरोपी गिरफ्तार
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने अपनी जांच तेज करते हुए पिछले 24 घंटों में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में अहिल्यानगर से धनंजय लोखंडे और पुणे से मनीषा वाघमारे शामिल हैं। सीबीआई ने देशभर में 14 स्थानों पर तलाशी ली है और कई अहम सुराग जुटाए हैं। महाराष्ट्र के लातूर में भी सीबीआई की टीम ने निजी कोचिंग संस्थानों पर रेड की। यहां एक रिटायर्ड प्रोफेसर और एक काउंसलर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। इस कार्रवाई से पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।
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देशभर में सीबीआई की छापेमारी
इससे पहले जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें राउज एवेन्यू कोर्ट ने 7 दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे के संपर्क में थी और दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी। सीबीआई अब डिजिटल साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ रही है। देश के अलग-अलग शहरों में छापेमारी कर एजेंसी इस गिरोह की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
CBI ने कोर्ट में बताया क्यों जरूरी है कस्टडी ?
सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि आरोपियों से पुलिस कस्टडी में पूछताछ बेहद जरूरी है ताकि इस तरह के अपराध दोबारा न हों। एजेंसी ने दलील दी कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना आवश्यक है। इसके अलावा डिजिटल डिवाइस, मोबाइल डेटा, चैट, कॉल रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की पूरी जानकारी जुटानी है। सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित होने से रोकना भी जरूरी बताया गया।
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लाखों में हुई थी डील
CBI जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2026 में नासिक के शुभम ने यश यादव को बताया कि मंगीलाल ने अपने छोटे बेटे के लिए लीक पेपर की मांग की थी। इसके लिए 10 से 12 लाख रुपये की डील तय हुई थी। मंगीलाल ने व्हाट्सएप पर संपर्क कर प्रश्नपत्र मांगे थे और इसके बदले पैसे देने की बात हुई थी। शुभम ने इसके लिए 10वीं-12वीं के दस्तावेज, रोल नंबर और एक चेक सिक्योरिटी के तौर पर लिया। हालांकि ये दस्तावेज आगे नहीं भेजे गए, जिससे जांच में नई परतें खुल रही हैं।
री-एग्जाम का फैसला, छात्रों पर बढ़ा दबाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दोबारा परीक्षा करवाने के फैसले ने छात्रों और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लाखों छात्र जो पहले ही तैयारी में समय और पैसा लगा चुके थे, अब उन्हें फिर से परीक्षा की तैयारी करनी होगी। इससे आर्थिक बोझ के साथ-साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा है। अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है, क्योंकि उन्हें अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है।












