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Happy Birthday DK Shivakumar:जेल से लौटकर और मजबूत हुए DKS...क्या बन सकते हैं CM? जानें कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद चेहरे का राजनीतिक सफर

कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का आज जन्मदिन है, उनका जन्म 15 मई 1962 को कनकपुरा में हुआ था, जो उनके राजनीतिक क्षेत्र का भी केंद्र है। वे एक साधारण परिवार से आते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा कर्नाटक में ही पूरी की और बाद में ग्रेजुएशन किया।
जेल से लौटकर और मजबूत हुए DKS...क्या बन सकते हैं CM? जानें कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद चेहरे का राजनीतिक सफर

डीके शिवकुमार ने पहली बार 1989 में विधायक के रूप में चुनाव जीता और तब से कई बार कनकपुरा सीट से जीत दर्ज की। वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राज्य में सरकार गठन और राजनीतिक रणनीति में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है।

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के मास्टर के रुप में पहचान  

कर्नाटक की राजनीति में उन्हें अक्सर मनीबैग और क्राइसिस मैनेजर कहा जाता है। जब भी पार्टी मुश्किल में होती है, तो उन्हें ही आगे किया जाता है खासतौर पर सरकार बचाने के मामलों में। इसके साथ उन्हें रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का मास्टर भी कहा जाता है, क्योंकि 2019 के राजनीतिक संकट के दौरान उन्होंने कांग्रेस विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए रिसॉर्ट में ठहराया। उस समय वे लगातार सुर्खियों में रहे और अपनी रणनीति से पार्टी को संभालने की कोशिश की। 

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जेल भी गए, लेकिन मजबूत होकर लौटे

ईडी मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्हें 2019 में जेल भी जाना पड़ा। लेकिन बाहर आने के बाद उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ी और वे पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरे। डीके शिवकुमार का राजनीतिक क्षेत्र कनकपुर है, कनकपुरा में उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि उन्हें वहां का 'सुल्तान' कहा जाता है। इस सीट से वे कई बार विधायक बने हैं और यहां उनका जबरदस्त जनाधार है।

पोस्टरों ने छेड़ी नई राजनीतिक बहस

उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के जन्मदिन समारोह से पहले बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में अगले मुख्यमंत्री डीकेएस लिखे पोस्टर दिखाई देने के बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर नई अटकलें फिर से सामने आई हैं। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने एक बार फिर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष को सुर्खियों में ला दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर पहले से ही चर्चाएं जारी थीं। पोस्टरों ने इन चर्चाओं को और हवा देने का काम किया है।

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सत्ता-साझाकरण की चर्चाएं फिर तेज

यह नया अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब 2023 में कांग्रेस द्वारा सरकार बनाने पर शिवकुमार और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच सत्ता-साझाकरण की व्यवस्था की लगातार अफवाहें फैल रही हैं। सरकार के पांच साल के कार्यकाल के आधे पड़ाव पर पहुंचने के साथ ही, राज्य के राजनीतिक हलकों में संभावित नेतृत्व परिवर्तन या मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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