PlayBreaking News

एमपी में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण मामला:हाईकोर्ट में टली सुनवाई, 50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा बना विवाद

मध्यप्रदेश में ओबीसी के आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 16 जून तक के लिए टल गई है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के सामने मामले की अहम दलीलें रखी गईं। सामान्य वर्ग की ओर से आरक्षण की सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया।
Follow on Google News
हाईकोर्ट में टली सुनवाई, 50 प्रतिशत सीमा का मुद्दा बना विवाद

जबलपुर। गुरुवार को 89 मामलों पर सुनवाई हुई, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने अपनी दलीलें पूरी कीं। सामान्य वर्ग की ओर से 50 फीसदी सीमा से अधिक आरक्षण को असंवैधानिक बताया गया। डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए 16 जून को दोपहर ढाई बजे का समय निर्धारित किया। अब आगामी सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी और शोभा गुप्ता पक्ष रखेंगी।

आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर उठे सवाल

एमपी में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के फैसले को लेकर कानूनी विवाद जारी है। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं में कहा गया है कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। सामान्य वर्ग की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी केस में स्पष्ट रूप से यह सीमा तय की गई है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने आरक्षण बढ़ाकर 63 प्रतिशत कर दिया। इसे याचिकाकर्ताओं ने असंवैधानिक करार दिया है। मामले में कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना।

ये भी पढ़ें: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर SC सख्त: कहा- चयन समिति में LoP की भूमिका सिर्फ दिखावटी न रहे

2019 में कमलनाथ सरकार ने बढ़ाया था आरक्षण

गौरतलब है कि अशिता दुबे और 11 अन्य की ओर से दायर इन मामलों में प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किये जाने को चुनौती दी गई थी। तत्कालीन सरकार ने 8 जुलाई 2019 को आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के संबंध में विधानसभा से बिल पारित किया था। इसके बाद 17 जुलाई 2019 को इसका गजट नोटिफिकेशन प्रकाशित किया गया। इस फैसले को लागू करने के बाद कुल आरक्षण का प्रतिशत 63 हो गया था। याचिकाओं में इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताया गया है।

कोर्ट में क्या हुई दलीलें ? 

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने अपनी दलीलें डिवीजन बेंच के सामने रखीं। उन्होंने आरक्षण की सीमा और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए अपने पक्ष को विस्तार से रखा। सामान्य वर्ग की ओर से कहा गया कि आरक्षण की अधिकतम सीमा तय होने के बावजूद राज्य सरकार ने इसका उल्लंघन किया है। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपने-अपने तर्कों को विस्तार से रखा।

ये भी पढ़ें: दिल्ली हाईकोर्ट का अरविंद केजरीवाल पर बड़ा एक्शन : अवमानना का नोटिस जारी, कहा- ऐसी हरकतों से अराजकता फैल सकती है

16 जून को होगी अगली सुनवाई

वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी की दलीलें पूरी होने के बाद डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई की तारीख तय की। कोर्ट ने कहा कि 16 जून को दोपहर ढाई बजे से होने वाली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी अपनी दलीलें रखेंगे। उनके बाद सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता अपना पक्ष रखेंगी। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts