Gwalior News : तानसेन की सभा में हिंदुस्तानी, अफगानी व अमेरिकन तहजीबों के सुरों का संगम, रसिकों पर छोड़ी गहरी छाप

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Gwalior News : तानसेन की सभा में हिंदुस्तानी, अफगानी व अमेरिकन तहजीबों के सुरों का संगम, रसिकों पर छोड़ी गहरी छाप

ग्वालियर। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में गान महिर्षि तानसेन की याद में आयोजित हो रहे सालाना संगीत समारोह में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने गायन-वादन की प्रस्तुति दे रसिकों को रागों से मालामाल कर रहे हैं। गुरुवार की प्रात:कालीन सभा में संगीत रसिक हिंदुस्तानी, अफगानी व अमेरिकन तहजीबों के मिलन के साक्षी बने।

कलाकारों ने पश्चिमी व अफगानी सुरों को छेड़ा

शुद्ध शास्त्रीय प्रस्तुतियों के साथ सात समंदर पार संयुक्त राज्य अमेरिका से आए कलाकार मिस्टर विलयम रीस हॉफमैन ने जब पश्चिमी व अफगानी सुरों को छेड़ा तो एक बारगी ”मिले सुर मेरा तुम्हारा…” की भावभूमि साकार हो उठी। वास्तवं में सुरों का एक ऐसा कोलाज़ बना, जिसमें संगीत का हरेक रंग नुमाया हो रहा था, उनकी सांगीतिक प्रस्तुतियों का बड़ी संख्या में मौजूद गुणीय रसिकों ने जी-भरकर आनंद उठाया। सभा का आगाज़ पारंपरिक ढंग से सारदा नाद मंदिर ग्वालियर के विद्यार्थियों व आचार्यों द्वारा प्रस्तुत ध्रुपद गायन से हुआ। राग “परमेश्वरी” ताल चौताल में निबद्ध बंदिश के बोल थे “सरस्वती आदि रूप “। पखावज पर यमुनेश नागर व हारमोनियम पर अनूप मोघे ने साथ निभाया।

पाश्चात्य व अफगान लोक धुनों से दी स्वरांजलि

विश्व संगीत समागम तानसेन समारोह में सुदूर देश संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिष्ठित रुबाब वादक ने मिस्टर विलयम रीस हॉफमैन ने सुर सम्राट तानसेन के दरबार में पाश्चात्य व अफगान लोक धुनों से स्वरांजलि दी। उन्होंने अफगानी वाद्य यंत्र रुबाब से उत्कृष्ट वादन कर मैहर घराना एवं काबुल के उस्ताद नबी गोल की सांगीतिक परंपरा की मीठी-मीठी धुनें निकाल कर सुधीय रसिकों पर गहरी छाप छोड़ी। विलियम रीस भारतीय सरोद वादन में भी निपुण हैं।
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