'सिर्फ 1 वोट से हार गए'!DMK कैंडिडेट कभी नहीं भूल पाएगा ये जख्म!

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और इस बार का चुनाव पूरी तरह से चौंकाने वाला रहा। सबसे बड़ी खबर यह रही कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने राज्य में सबसे अधिक सीटें जीतकर एक नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। पार्टी ने न केवल मजबूत प्रदर्शन किया, बल्कि अपने विरोधियों को भी बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया।
इन नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ TVK की जीत को एक बड़े जनसमर्थन के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई सीटों पर बेहद करीबी मुकाबलों ने सबको हैरान कर दिया है।
एक वोट से हार-जीत का खेल
तमिलनाडु के इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट की हो रही है। वजह बेहद खास और चौंकाने वाली है यहां मुकाबला सिर्फ एक वोट के अंतर से तय हुआ।
डीएमके मंत्री को मिली करारी हार
इस सीट पर डीएमके के वरिष्ठ नेता और राज्य के सहकारिता मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें TVK के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर ने बेहद कम अंतर से हरा दिया। मतगणना के बाद सामने आए आंकड़ों ने सभी को हैरान कर दिया। सीनिवास सेतुपति को कुल 83,375 वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन एक वोट से पीछे रह गए। यही एक वोट उनके राजनीतिक भविष्य पर भारी पड़ गया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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क्यों खास है यह मुकाबला?
- जीत और हार का अंतर सिर्फ 1 वोट
- मंत्री स्तर के नेता को मिली हार
- TVK को मिली ऐतिहासिक जीत
- देश के सबसे करीबी चुनावी मुकाबलों में शामिल
TVK की बड़ी जीत
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी ने कुल 108 सीटें जीतकर सभी को पीछे छोड़ दिया है। यह नतीजा तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
जनता का बड़ा समर्थन
TVK की जीत को सीधे तौर पर जनता के बढ़ते समर्थन से जोड़ा जा रहा है। पार्टी ने अपने अभियान में विकास, रोजगार और नई राजनीतिक सोच को मुख्य मुद्दा बनाया था, जिसका असर नतीजों में साफ दिखाई दिया।
अन्य पार्टियों का प्रदर्शन
इस चुनाव में बाकी प्रमुख पार्टियों का प्रदर्शन भी सामने आया है-
DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम)- DMK को इस चुनाव में 59 सीटें मिलीं और पार्टी दूसरे स्थान पर रही। हालांकि कई बड़े नेता जीतने में सफल रहे, लेकिन कई अहम सीटों पर हार ने पार्टी को बड़ा झटका दिया।
AIADMK- AIADMK ने 47 सीटें जीतकर तीसरा स्थान हासिल किया। पार्टी का प्रदर्शन पहले की तुलना में कमजोर माना जा रहा है।
कांग्रेस- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को इस बार केवल 5 सीटों पर जीत मिली। गठबंधन में होने के बावजूद पार्टी का प्रभाव सीमित नजर आया।
PMK- पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) ने 4 सीटें जीतीं और कुछ इलाकों में अपनी पकड़ बनाए रखी।











