तमिलनाडु में बीजेपी ने गठबंधन बचाने के लिए बड़े समझौते किए हैं, जिसमें अन्नामलाई को पीछे रखना सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। अब देखना होगा कि चुनाव में इसका फायदा मिलता है या नुकसान।
अन्नामलाई लगातार के पलानीस्वामी और AIADMK पर हमलावर रहे। खासतौर पर निजी टिप्पणियों ने रिश्तों में खटास बढ़ा दी। दोनों नेताओं का एक ही समुदाय से होना भी टकराव की वजह बना। यही कारण रहा कि अप्रैल 2025 में अन्नामलाई को राज्य अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और उनकी जगह नए चेहरे को मौका दिया गया।
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गठबंधन के लिए बीजेपी को कई समझौते करने पड़े। कोयंबटूर जैसी अहम सीट, जहां से अन्नामलाई चुनाव लड़ना चाहते थे, वह भी पार्टी को नहीं मिल पाई। बीजेपी ने सिंगनल्लूर, सुलूर और कवुंडमपलायम जैसी सीटों की मांग की थी, लेकिन AIADMK ने ज्यादातर मांगें ठुकरा दीं। आखिरकार बीजेपी को कुल 27 सीटें मिलीं, लेकिन कोयंबटूर क्षेत्र में उसे सिर्फ एक सीट ही मिल सकी।
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बता दें कि अन्नामलाई पहले भी चुनाव हार चुके हैं, लेकिन उनका प्रभाव कम नहीं हुआ। 2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने कोयंबटूर से करीब 4 लाख 50 हजार वोट हासिल किए थे। हालांकि हाल की अहम बैठकों में उनकी गैर मौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के कुछ नेताओं को उम्मीद है कि अन्नामलाई चुनाव लड़ेंगे, लेकिन फिलहाल स्थिति साफ नहीं है।