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97 रैलियां, 54 रोड शो और फुल पावर कैंपेन…बीजेपी का 2026 चुनाव प्लान डिकोड

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बीजेपी की बड़ी जीत के पीछे 97 रैलियों, 54 रोड शो और हाई-इम्पैक्ट कैंपेन की रणनीति रही। अमित शाह ने सबसे ज्यादा जिम्मेदारी संभाली, जबकि नरेंद्र मोदी ने बड़े जनसमूहों को साधा। जानिए कैसे बीजेपी ने बंगाल से लेकर असम तक चुनावी प्लानिंग को जमीन पर उतारा।
बीजेपी का 2026 चुनाव प्लान डिकोड

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत ने सभी को चौंकाया जरूर, लेकिन यह जीत अचानक नहीं आई। इसके पीछे महीनों की प्लानिंग, जमीन पर लगातार मेहनत और शीर्ष नेतृत्व की स्पष्ट प्राथमिकताएं थी। 207 सीटों पर जीत हासिल कर बीजेपी ने न सिर्फ सत्ता हासिल की, बल्कि राज्य की राजनीति का समीकरण ही बदल दिया। वहीं तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। अब सवाल यही है कि आखिर ऐस क्या हुआ कि बीजेपी ने इतने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर ली? इसका जवाब छिपा है पार्टी के चुनावी ब्लूप्रिंट में। 

256 कार्यक्रमों का मेगा प्लान

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी। पार्टी ने कुल 256 चुनावी कार्यक्रमों का प्लान तैयार किया था, जिसमें 97 बड़ी रैलियां, 54 रोड शो, 6 मंदिर दर्शन, 14 जनसंपर्क कार्यक्रम और एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस का कार्यक्रम भी शामिल था, जो खुद गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। इन कार्यक्रमों से साफ है कि बीजेपी की रणनीति बड़े स्तर पर रैलियों, रोड-शो पर आधारित थी।

सबसे ज्यादा जिम्मेदारी अमित शाह के पास, हर मोर्चे पर एक्टिव

अगर पूरे कैंपेन में किसी एक नेता का सबसे ज्यादा असर दिखा तो वो थे अमित शाह। अमित शाह ने अकेले 37 जनसभाएं कीं, 16 रोड शो किए और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी संबोधित की। इसके अलावा उन्होंने मंदिर दर्शन और कई छोटे कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।

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पीएम मोदी का हाई-इम्पैक्ट फॉर्मूला

जहां अमित शाह लगातार मैदान में डटे रहे, वहीं नरेंद्र मोदी ने हाई-इम्पैक्ट कैंपेन पर फोकस किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब दो दर्जन बड़ी रैलियां कीं और चार रोड शो में हिस्सा लिया। पीएम मोदी का प्रचार बड़े जनसमूह और बड़े इवेंट्स पर केंद्रित रहा। पांच राज्यों के चुनाव में पीएम मोदी की सबसे ज्यादा रैलियां पश्चिम बंगाल में ही हुईं। गृह मंत्री अमित शाह के सबसे ज्यादा रोड शो यहीं हुए। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का फोकस बौद्धिक और सामाजिक कार्यक्रमों पर रहा। पश्चिम बंगाल में बीजेपी का कैंपेन सिर्फ रैलियों या रोड शो पर आधारित नहीं था। बीजेपी ने चाय बागान श्रमिकों, खेल क्लबों, वाल्मीकि समाज, बुद्धिजीवियों और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिये भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया।

नड्डा और अन्य नेताओं की अलग रणनीति

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य नेताओं ने भी अपनी-अपनी भूमिका निभाई। नड्डा का फोकस बौद्धिक वर्ग, सामाजिक संगठनों और छोटे समूहों से संवाद पर रहा। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचार किया।

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असम में अलग रणनीति, मजबूती पर जोर

जहां बंगाल में बीजेपी ने आक्रामक रणनीति अपनाई, वहीं असम में पार्टी का फोकस थोड़ा अलग रहा। असम में बीजेपी ने नए प्रयोग करने के बजाय अपने मौजूदा समर्थन को मजबूत करने पर ध्यान दिया। यानी यहां रणनीति स्थिरता बनाए रखने की थी, न कि बड़ा बदलाव करने की। दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु और केरल में पार्टी का अभियान सीमित और प्रतीकात्मक रहा। 

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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