Mother's Day Special :मप्र की स्वर्णलता, दुनिया की इकलौती 'मां' जिसे याद हैं अपने 3 जन्म!

राजीव सोनी, भोपाल। 'मां' की महानता, ममता, त्याग और समर्पण को शब्दों में बांधना आसान काम नहीं। लेकिन 'मां' की यह दुर्लभ कहानी तो अपने दो जन्मों के बच्चों पर ममता लुटाने की है। भोपाल की रिटायर प्रो. स्वर्णलता तिवारी (79) को अपने 3 जन्मों की यादें ताजा हैं। पिछले जन्म के भाई-भतीजे, बेटे-बेटी और उनकी तीन पीढि़यों से आज भी भावुकता भरे रिश्ते चल रहे हैं। वर्तमान और पिछले जन्म के (मायका-ससुराल) चारों परिवारों व बच्चों से उनका प्रेम-स्नेह बना हुआ है। अभी उनके दो बेटे संजीव व संदीप हैं।
मैहर में थे पिछले जन्म के बच्चे
मैहर में पिछले जन्म के उनके दोनों बेटे (मुरली-नरेश और बेटी सावित्री) तो अब नहीं रहे लेकिन देवर के 93 व 70 वर्षीय दो बेटे भोला और डॉ. राहुल पांडे (शहडोल) हैं जो उन्हें अपनी बड़ी मम्मी ही मानते हैं। 2-4 महीने में बच्चों के साथ मिलने जरूर आते हैं। यही स्थिति कटनी के पाठक परिवार की है, पूर्व मंत्री संजय पाठक उनकी मम्मी निर्मला देवी और अन्य परिजन-बच्चे भी भोपाल में उनसे मिलने आते हैं। दोनों परिवार के कार्यक्रमों में स्वर्णलता का पूरा का परिवार शामिल होता है।
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126 साल से चल रही 3 जन्मों की कहानी
सुपर से भी सुपर मॉम स्वर्णलता के 3 जन्मों की यह कहानी पिछले 126 साल से चली आ रही है। कटनी में उनका पहला जन्म बूंदी बाई उर्फ बिया के रूप में हुआ। 39 साल में उनकी मौत हुई। फिर अगला जन्म एक साल बाद सिलहट (बंगलादेश) में कमलेश गोस्वामी के रूप में हुआ और 1947 में सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। वर्जीनिया यूनिवर्सिटी अमेरिका के पैरासाइकोलॉजी के प्रोफेसर इयान स्टीवेंशन, मप्र के पूर्व सीएम डीपी मिश्रा, जयपुर यूनिवर्सिटी के पैरासाइकोलॉजी प्रो. बनर्जी और देश के पुनर्जन्म विशेषज्ञ प्रो. कीर्ति स्वरूप रावत लंबी रिसर्च के बाद स्वर्णलता के दोनों जन्म की पुष्टि कर चुके हैं। उनका वर्तमान जन्म 2 मार्च 1948 को टीकमगढ़ जिले के शाहपुर गांव में हुआ। 1973 में पूर्व आईएएस डीपी तिवारी से उनका विवाह हुआ।
बॉटनी की प्रोफेसर रहीं स्वर्णलता
भोपाल कमिश्नर रहे पूर्व आईएएस डीपी तिवारी की पत्नी स्वर्णलता बॉटनी की प्रोफेसर रहीं। उनके पुनर्जन्म के केस को दुनिया भर के विशेषज्ञ रिसर्च कर चुके हैं। स्वर्णलता का पिछला जन्म (वर्ष 1900) कटनी में पूर्व मंत्री संजय पाठक के पिता की बुआ (बूंदा बाई) के रूप में हुआ था। उनकी शादी मैहर के चिंतामणि पांडे से हुई थी। इन दोनों परिवारों से आज भी उनका जीवंत संपर्क और सुख-दुख का साथ बना हुआ है।
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दुनिया का दुर्लभ केस, दो जन्मों के रिश्ते संभाल रहीं
स्वर्णलता का यह केस दुर्लभ है। रिसर्च के लिए मैंने प्रो. कीर्ति स्वरूप रावत के साथ उनसे कई बार मुलाकात की। उनके पिछले जन्म के बच्चे-परिजन आज भी वही सम्मान देते हैं। वह पिछले जन्मों के रिश्तों को संभाल रही हैं। -डॉ. ज्योति गुप्ता, पैरासाइकोलॉजिस्ट एवं पुनर्जन्म विशेषज्ञ, इंदौर.
क्या कहते हैं पति

वह बड़ी विद्वान,सहज-सरल और ईश्वरवादी हैं। जिन्हें भी मालूम पड़ता है वे सभी मुझसे बड़ी जिज्ञासा के साथ पत्नी के बारे में पूछते हैं। साइंटिस्ट और मीडिया के लोग एप्रोच करते हैं।
डीपी तिवारी, पूर्व आईएएस
बेटे की नजर में 'मां'
मेरी 'मां' अद्भुत हैं। उन पर ईश्वर की बड़ी कृपा है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा के संबंध में जो भी बातें कहीं हैं वे शाश्वत सत्य हैं। शरीर बदलते हैं आत्मा अमर है, यात्रा करती है।
संजीव तिवारी, चीफ इंजीनियर भारतीय रेलवे जबलपुर
दो जन्मों से हमारे परिवार की सदस्य

वे पिछले जन्म से मेरे पिता की बुआ हैं। हमारा सौभाग्य पूरे परिवार को उनका आशीर्वाद-स्नेह मिल रहा है। आज भी घर की सबसे सम्मानित सदस्य वही हैं। ईश्वर उन्हें सदा स्वस्थ रखें।
संजय पाठक विधायक एवं पूर्व मंत्री कटनी
दो जन्म से मेरी बड़ी मम्मी
बड़ी मम्मी महान आत्मा हैं। हमें सभी पर उनकी ममता बरस रही है। भले ही उनका यह नया जन्म है लेकिन पिछले जन्म में वह मेरी बड़ी मम्मी थीं और आज भी हैं। मेरे 93 वर्षीय भैया का नामकरण उन्होंने ही किया था।
डॉ. राहुल पांडे रिटायर्ड सिविल सर्जन शहडोल












