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Mother's Day Special :मां बन बेटे को तराशा, अब दादी बनकर पोते को सिखा रहीं क्रिकेट के गुर

इंदौर जिले के महू में एक मां अपने बेटे के बाद अब पोते को क्रिकेटर बनने के गुर सिखा रही हैं। यही नहीं वे जरूरतमंदों बच्चों की भी मां जैसी हैं। उन्हें वे नि:शुल्क क्रिकेट की कोचिंग देती हैं।
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मां बन बेटे को तराशा, अब दादी बनकर पोते को सिखा रहीं क्रिकेट के गुर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रभा उपाध्याय, इंदौर। महू की एक मां की जिद आज सैकड़ों बच्चों के सपनों को आकार दे रही है।  63 वर्षीय मीना श्रीवास्तव ने पहले बेटे रोहन को क्रिकेटर बनाया और अब पोते रेवान श्रीवास्तव  के साथ- साथ इंदौर में अपनी आइकॉन क्रिकेट अकादमी के जरिए 150 से ज्यादा बच्चों को क्रिकेट की गुर सिखा रही हैं। मीना श्रीवास्तव के लिए क्रिकेट एक खेल नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली विरासत है।

    संघर्ष से बनी पहचान

    1980-81 में, जब लड़कियों का क्रिकेट खेलना आसान नहीं था, मीना महू से इंदौर बस से प्रैक्टिस के लिए आती थीं। सामाजिक बंदिशों के बावजूद उन्होंने संध्या अग्रवाल जैसी खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए खुद को साबित किया। 

    परिवार बना ताकत

    शादी के बाद उनके पति प्रदीप श्रीवास्तव, जो स्वयं फुटबॉल खिलाड़ी थे, ने भी उनका सपना आगे बढ़ाया। दोनों ने तय किया कि उनका बेटा  या बेटी जो भी होगी उसको खिलाड़ी बनेगा। बेटे का नाम उन्होंने अपने पसंदीदा क्रिकेटर सुनील गावस्कर के बेटे से प्रेरित होकर “रोहन” रखा।

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    बेटे ने बढ़ाया नाम 

    रोहन श्रीवास्तव ने अंडर-13 से रणजी ट्रॉफी तक क्रिकेट खेला, रेलवे टीम से जुड़े और इंदौर में कोचिंग दी। उनके जूनियर्स में रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर और आवेश खान जैसे खिलाड़ी रहे। आज वे बीसीसीआई अंपायर हैं।

    150 बच्चों की कोच

    मीना ने 2013 में महू और 2021 में इंदौर में अकादमी शुरू की। यहां 150 से अधिक बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें कई लड़कियां शामिल हैं। उनकी शिष्या प्रियंका कौशल महिला आईपीएल टीम की नेट बॉलर रह चुकी हैं।

    जुनून सबसे बड़ा 

    वे जरूरतमंद बच्चों से नाममात्र या बिना फीस के प्रशिक्षण देती हैं। उनका कहना है, “बच्चों की आंखों का सपना फीस से बड़ा होता है।”

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    तीसरी पीढ़ी तक विरासत 

    अब वे अपने पोते को भी क्रिकेट सिखा रही हैं, “मेरी पारी जारी है, अब अगली पीढ़ी इसे आगे बढ़ाएगी।”

    मीना श्रीवास्तव एक नजर में

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    उम्र: 63 वर्ष

    शुरुआत: महू

    उपलब्धि: बेटे को रणजी स्तर तक पहुंचाया

    वर्तमान: इंदौर में अकादमी

    प्रशिक्षण: 150+ बच्चे

    विशेष: जरूरतमंदों को रियायती/मुफ्त कोचिंग

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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