Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

कान्हा टाइगर रिजर्व:जंगली भैंसों का कुनबा बढ़ा, असम से आए 4 नए मेहमान

कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम से 4 जंगली भैंसों को लाया गया है। वन्यजीवों को असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से विशेष वाहनों के जरिए सड़क मार्ग से कान्हा लाया गया।
जंगली भैंसों का कुनबा बढ़ा, असम से आए 4 नए मेहमान

कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत शनिवार को असम से लाए गए 4 और जंगली भैंसों को सफलतापूर्वक बाड़े में रिलीज किया गया। इसके साथ ही कान्हा में जंगली भैंसों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है जिनमें 2 नर और 6 मादा शामिल हैं।

पीसीसीएफ समिता राजौरा ने किया बाड़े में रिलीज

द्वितीय चरण में पहुंचे इन जंगली भैंसों को पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ समिता राजौरा और एपीसीसीएफ एल कृष्णमूर्ति की मौजूदगी में सूपखार परिक्षेत्र के विशेष बाड़े में छोड़ा गया। अधिकारियों ने वन अमले को 24 घंटे निगरानी रखने और लगातार स्वास्थ्य मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं।

3 साल में 50 जंगली भैंसे बसाने की योजना

कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत अगले 3 वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहला चरण 28 अप्रैल 2026 को पूरा हुआ था जब असम से 4 जंगली भैंसे लाए गए थे। अब दूसरे चरण में भी 4 और भैंसे शामिल किए गए हैं।

ये भी पढ़ें: Yogi Cabinet: यूपी में कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल से की मुलाकात

2220 किलोमीटर का लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर

डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश कुमार वर्मा के मुताबिक इन वन्यजीवों को असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से विशेष वाहनों के जरिए सड़क मार्ग से कान्हा लाया गया। करीब 2220 किलोमीटर की दूरी तय करने में वन विभाग की टीम को 72 घंटे का लगातार सफर करना पड़ा। यात्रा के दौरान दो वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार जंगली भैंसों की स्वास्थ्य जांच करती रही ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से कान्हा तक पहुंचाया जा सके।

ये भी पढ़ें: MP News: 13 मई को खाते में आएगी लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त, सीएम डॉ. मोहन यादव ट्रांसफर करेंगे राशि

कान्हा के पारिस्थितिक तंत्र को मिलेगा मजबूती

पीसीसीएफ समिता राजौरा ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रेरणा से शुरू की गई यह परियोजना मध्यप्रदेश की जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने बताया कि सूपखार क्षेत्र को इसलिए चुना गया क्योंकि यहां ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। इस परियोजना से कान्हा का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत होगा और वन्यजीव पर्यटन व रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

Latest Posts