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Kalashtami 2026 :बटुक भैरव की कृपा पाने का खास दिन, कालाष्टमी पूजा से दूर होंगी बाधाएं

कालाष्टमी के पावन अवसर पर भगवान बटुक भैरव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस लेख में जानिए पूजा विधि, मंत्र जाप, भोग और पौराणिक कथा के साथ इसके धार्मिक लाभ। बटुक भैरव की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
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बटुक भैरव की कृपा पाने का खास दिन, कालाष्टमी पूजा से दूर होंगी बाधाएं

सनातन परंपरा में भगवान बटुक भैरव को भगवान शिव का सौम्य और बाल स्वरूप माना जाता है। इनकी पूजा मुख्य रूप से कालाष्टमी के दिन की जाती है। मान्यता है कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है और मई माह में यह तिथि 9 तारीख को पड़ रही है। इस दिन पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

बटुक भैरव की पूजा कब और कैसे करें

बटुक भैरव की पूजा के लिए कालाष्टमी और रविवार को अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा का सबसे अच्छा समय सुबह या रात 10 बजे के बाद माना जाता है।

पूजा विधि इस प्रकार है-

  • बटुक भैरव की मूर्ति या चित्र को घर के ईशान कोण या मंदिर में रखें
  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें
  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर चित्र स्थापित करें
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें
  • पुष्प, चंदन, धूप, दीप, फल, मिठाई, काली उड़द और वस्त्र अर्पित करें

भोग में क्या अर्पित करें?

भगवान बटुक भैरव को प्रसन्न करने के लिए विशेष भोग लगाया जाता है, जैसे-

  • मीठी रोटी या रोट
  • खीर
  • आटे और मेवे के लड्डू
  • गुड़ और आटे से बने पुए
  • गुड़ और चना

मंत्र जप

पूजा में इस मंत्र का जप अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है-

‘ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं’

इस मंत्र का जाप 21, 51 या 100 माला तक किया जा सकता है। जाप के लिए रुद्राक्ष माला का उपयोग शुभ माना जाता है।

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बटुक भैरव की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार ‘आपद्’ नामक राक्षस ने ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसका वध केवल 5 वर्ष के बालक द्वारा ही हो सकता है। इस वरदान के बाद वह तीनों लोकों में उत्पात मचाने लगा।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव के तीसरे नेत्र से बाल स्वरूप बटुक भैरव का प्राकट्य हुआ। उन्होंने उस राक्षस का अंत कर देवताओं को भय से मुक्त किया।

प्रमुख मंदिर

बटुक भैरव का प्रसिद्ध मंदिर वाराणसी में स्थित है, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन और पूजा के लिए आते हैं।

पूजा के लाभ

बटुक भैरव की पूजा से व्यक्ति को कई लाभ मिलते हैं-

  • शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है
  • जीवन में सुख और समृद्धि बढ़ती है
  • नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति मिलती है
  • जीवन में स्थिरता और सफलता प्राप्त होती है

कालाष्टमी के दिन बटुक भैरव की श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को साहस, सुरक्षा और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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