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फॉर्म-6 को लेकर किस बात पर हुआ विवाद? सुप्रीम कोर्ट ने बताई हकीकत

मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। अदालत ने कहा कि उसने संशोधित फॉर्म को न मंजूरी दी है और न ही खारिज किया है। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की सुनवाई के दौरान यह फॉर्म अदालत के सामने नहीं था।
फॉर्म-6 को लेकर किस बात पर हुआ विवाद? सुप्रीम कोर्ट ने बताई हकीकत
फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से जुड़े नए फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को अहम स्पष्टीकरण दिया। अदालत ने साफ किया कि उसने इस फॉर्म की वैधता पर अब तक कोई फैसला नहीं सुनाया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि निर्वाचन आयोग संशोधित फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने की बात कह चुका है। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने स्पष्ट किया कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई के समय नया फॉर्म अदालत के सामने आया ही नहीं था।

नए फॉर्म-6 पर अदालत ने क्यों दी सफाई?

सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत के सामने निर्वाचन आयोग के उस दावे का मुद्दा उठाया, जिसमें संशोधित फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने की बात कही गई थी। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत ने नए फॉर्म को लेकर कोई न्यायिक निर्णय नहीं दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुराने मामले की सुनवाई के समय यह संशोधित फॉर्म मौजूद नहीं था। इसलिए अदालत की पिछली टिप्पणी को नए फॉर्म की मंजूरी या अस्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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CJI सूर्यकांत ने वकील को क्या समझाया?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकीलों को अदालत की टिप्पणियों को चुनकर पेश करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खबर बनाने के लिए अदालत के शब्दों को अलग-अलग तरीके से नहीं उठाना चाहिए। पीठ की इस टिप्पणी का मकसद पिछली सुनवाई में कही गई बातों का सही अर्थ स्पष्ट करना था। अदालत ने दोहराया कि बिहार SIR मामले में नए फॉर्म-6 की वैधता पर विचार नहीं किया गया था।

आखिर फॉर्म-6 क्या है और विवाद किस बात पर है?

फॉर्म-6 का इस्तेमाल पात्र नागरिक मतदाता सूची में पहली बार अपना नाम दर्ज कराने के लिए करते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान इसके संशोधित ऑनलाइन प्रारूप में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने पर सवाल उठे हैं। इसमें आवेदक से पुरानी मतदाता सूची में अपने या परिवार के कुछ सदस्यों के नाम दर्ज होने से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है। इस बदलाव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि मौजूदा नियमों के तहत ऐसी अतिरिक्त जानकारी मांगना जरूरी किया जा सकता है या नहीं।

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27 अक्टूबर को फिर होगी मामले की सुनवाई

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ याचिका पर नोटिस जारी करने के लिए सहमत हुई। मामले को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर संबंधित याचिकाओं के साथ 27 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है। अब आगे की सुनवाई में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर विचार हो सकता है। फिलहाल अदालत की ओर से संशोधित फॉर्म को वैध या अवैध घोषित करने का कोई फैसला नहीं दिया गया है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...

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