ज्ञानेश कुमार को लेकर मोदी सरकार पर क्यों भड़के अभिजीत दीपके? दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार उसके लिए इतने अहम क्यों हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं, पत्रकारों और सांसदों के साथ मारपीट की जा रही है। दीपके का यह बयान विरोध प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने और बाद में कुछ शर्तों पर रिहा होने के घटनाक्रम के बीच आया है। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
एक्स पोस्ट में उठाया सरकार की भूमिका पर सवाल
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दिल्ली पुलिस युवाओं, पत्रकारों और सांसदों के साथ मारपीट कर रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार इतनी मजबूती से क्यों खड़ी है। यह दीपके का आरोप और राजनीतिक सवाल है। उनके बयान में कथित घटनाओं का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।
एयरपोर्ट पर हिरासत के बाद मिली रिहाई
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था। अगले दिन अदालत ने तीनों को कुछ शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया। उन्हें एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर छोड़ा गया।
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मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी और कुछ विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों पर सवाल उठा रहे हैं। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
आरोपों पर जवाब का इंतजार
दीपके के बयान में सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन इससे अपने आप किसी गलत काम की पुष्टि नहीं होती। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और कथित मारपीट से जुड़े आरोपों को समझने के लिए संबंधित घटनाओं का विवरण और सभी पक्षों का जवाब जरूरी है। फिलहाल, इस विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई जैसे मुद्दे बने हुए हैं।




















