महिला वकीलों के लिए बार काउंसिल में 30% आरक्षण का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट! CJI ने विरोधी चिट्ठी पर उठाया सवाल

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में स्टेट बार काउंसिल में महिलाओं के 30 फीसदी प्रतिनिधित्व से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। यह मामला महिलाओं की बार काउंसिल में भागीदारी बढ़ाने के लिए अदालत की ओर से तय व्यवस्था से जुड़ा है। दिसंबर 2025 के आदेश में कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल की कुल सीटों में महिलाओं के लिए 30 फीसदी प्रतिनिधित्व का निर्देश दिया था। इसमें 20 फीसदी सीटें चुनाव के जरिए और 10 फीसदी सीटें को-ऑप्शन से भरने की व्यवस्था बताई गई थी।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 30 फीसदी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था तय की थी। कोर्ट के आदेश के मुताबिक इस हिस्से में 20 फीसदी सीटें महिला उम्मीदवारों के चुनाव के जरिए और 10 फीसदी सीटें को-ऑप्शन से भरी जानी हैं। बाद में को-ऑप्शन की प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों को लेकर कई अर्जियां अदालत में पहुंचीं।
सुनवाई में महिला वकीलों के विरोध का मुद्दा
सुनवाई के दौरान CJI ने महिला वकीलों की ओर से सामने आए विरोध से जुड़े एक पत्र का जिक्र किया। रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर आपत्ति जताई गई थी और आरोप लगाया गया था कि अदालत बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारों में दखल दे रही है। इस पर वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने इन आरोपों को सही नहीं माना।
CJI ने पूछा- क्या आदेश वापस लिया जाए?
सुनवाई के दौरान CJI ने बार-बार दाखिल हो रही अर्जियों और विरोध से जुड़े मुद्दों पर सवाल किए। अदालत के सामने यह भी चर्चा हुई कि महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े अपने पहले के निर्देश को किस तरह आगे बढ़ाया जाए। कोर्ट ने साफ किया है कि मामले में आगे की सुनवाई महिलाओं के लिए तय प्रतिनिधित्व और बार काउंसिल की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर होगी।
जस्टिस बागची ने राय और तथ्य में बताया अंतर
सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कथित आपत्तियों पर टिप्पणी करते हुए तथ्य और राय के बीच अंतर का उदाहरण दिया। उन्होंने ब्रिटिश जज लॉर्ड डेनिंग से जुड़ा एक उदाहरण रखा। इसका मकसद यह बताना था कि किसी व्यक्ति या फैसले के बारे में कही गई हर बात तथ्य नहीं होती, कुछ बातें केवल राय भी हो सकती हैं।
BCI के अधिकारों पर भी उठा सवाल
मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानी BCI की भूमिका भी चर्चा में रही। विरोध करने वाले पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए गए। दूसरी ओर, अदालत के पहले के आदेशों में राज्य बार काउंसिल में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था तय की जा चुकी है। अब को-ऑप्शन और इसके तरीके से जुड़े सवालों पर कोर्ट की सुनवाई जारी है।
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30% प्रतिनिधित्व की व्यवस्था कैसे लागू होगी?
अदालत के दिसंबर 2025 के निर्देश के अनुसार राज्य बार काउंसिल में महिलाओं के लिए 30 फीसदी प्रतिनिधित्व तय किया गया था। इसमें 20 फीसदी सीटें चुनाव से और 10 फीसदी सीटें को-ऑप्शन से भरने की बात कही गई। बाद की कार्यवाही में को-ऑप्शन की प्रक्रिया को लेकर नियम और पात्रता से जुड़े सवाल सामने आए हैं।




















